डीपीआरओ की नोटिस के बाद सचिवों पर नहीं पड़ रहा असर
डीएम डॉ. अमित पाल ने 22 अप्रैल को 44 अफसरों की टीम के जरिए 132 ग्राम पंचायतों का निरीक्षण किया। डीपीआरओ ने 15 गांवों के सचिवों को आरआरसी संचालन में लापरवाही के लिए नोटिस जारी किए। 23 दिन बीत जाने के बाद भी सचिवों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

डीएम डॉ. अमित पाल ने 22 अप्रैल को 44 अफसरों की टीम लगाकर जिले की 132 ग्राम पंचायतों का निरीक्षण कराया था। अफसरों की रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह ने 15 गांवों के सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी कर माह के अंत तक आरआरसी संचालन की हिदायत दी थी। मामले में 23 दिन बीत जाने के बाद भी सचिवों के कानों में जूं नहीं रेंगी। डीएम के निर्देश पर 22 अप्रैल को 44 जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा 132 ग्राम पंचायतों में आरआरसी, वर्मी कंपोस्ट, ई-रिक्शा संचालन की स्थिति जानने के लिए औचक निरीक्षण किया गया था। नोडल अंधिकारियों 15 ग्रामसभाओं में आरआरसी संचालन न किए जाने की रिपोर्ट सौंपी थी।
अफसरों की रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआरओ ने तत्काल प्रभाव से विकास खंड नेवादा की ग्राम पंचायत किशनपुर अंबारी, चायल की चक बादशाहपुर, सिराथू की अफजलपुरवारी, अहिरारा, बसोहनी, कड़ा की ननमई, सरसवां की कटरी, बडहरी, कोरीपुर, ऊनौ, कौशाम्बी की मोहिद्दीनपुर देवछार, दिया उपरहार, कोसम खिराज, मूरतगंज की गौहानी कला व मंझनपुर की गुलामीपुर के ग्राम प्रधान सचिव को आरआरसी संचालन को लेकर नोटिस जारी किया था। इसके लिए उन्होंने 30 अप्रैल तक का समय भी निर्धारित किया था। नोटिस दिए जाने के बाद 23 दिन का समय बीत गया, पर आरआरसी संचालन में ग्राम प्रधान व सचिव रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफाई व्यवस्था को लेकर शासन के निर्धारित प्रोजेक्ट पर जिम्मेदार कितना संजीदा हैं।
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