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विदुरानी पर कृपा से लेकर ध्रुव चरित्र की भक्तों ने सुनी कथा

विदुरानी पर कृपा से लेकर ध्रुव चरित्र की भक्तों ने सुनी कथा

संक्षेप:

Kausambi News - किशुनपुर अंबारी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी के प्रवचनों से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि के गुणों का श्रवण किया। कथा में विदुरानी, वराहावतार, और ध्रुव चरित्र जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन हुआ, जिससे श्रोताओं को वैदिक ज्ञान की समझ मिली।

Feb 01, 2026 04:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कौशाम्बी
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नेवादा ब्लॉक क्षेत्र के किशुनपुर अंबारी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी के ओजस्वी प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा के दौरान विदुरानी पर कृपा, सृष्टि वर्णन, वराहावतार, कपिलापख्यान और ध्रुव चरित्र जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीहरि के गुणगान का श्रवण किया। कथा व्यास विद्याधर त्रिपाठी ने विदुरानी पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का वर्णन करते हुए बताया कि निष्काम भक्ति से भगवान सहज ही प्रसन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि विदुरानी का स्नेह और सेवा भाव इस बात का उदाहरण है कि ईश्वर केवल भाव देखते हैं, वैभव नहीं।

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इसके पश्चात सृष्टि वर्णन में पंचमहाभूतों की उत्पत्ति और ब्रह्मांड की रचना का विस्तार से उल्लेख किया गया है। जिससे श्रोताओं में वैदिक ज्ञान की समझ विकसित हुई। वराहावतार प्रसंग में कथा व्यास ने बताया कि जब पृथ्वी रसातल में चली गई थी, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया। यह प्रसंग धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का संदेश देता है। कपिलापख्यान अंतर्गत माता देवहूति को भगवान कपिल द्वारा दिए गए सांख्य योग के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग को सरल शब्दों में समझाया गया। ध्रुव चरित्र के वर्णन के दौरान कथा व्यास ने ध्रुव की अटल भक्ति, तपस्या और संकल्प शक्ति का मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने कहा कि ध्रुव की तरह दृढ़ निश्चय और गुरु मार्गदर्शन से साधक अल्पायु में भी परम पद को प्राप्त कर सकता है। इस प्रसंग ने श्रोताओं को धैर्य, श्रद्धा और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान भजनों और कीर्तन से श्रद्धालु भावविभोर होते रहे। आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया और व्यवस्थाओं की सराहना की गई। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ तीसरे दिन की कथा का समापन हुआ।