UPPCS Success Story: रात में ड्यूटी, दिन में किताबों से प्यार, सिपाही से अफसर बनेगा अमेठी का आशीष
कानपुर पुलिस लाइन में तैनात अमेठी के आशीष ने पीसीएस-2024 के परिणाम में 41वीं रैंक पाई है। आशीष सिपाही से अब कामर्शियल टैक्स ऑफिसर बनेगा। आशीष को विभाग के अफसरों ने मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया है।

UPPCS Success Story: अमेठी के छोरे ने पीसीएस-2024 में झंडे गाड़ दिए। पुलिस लाइन में तैनात सिपाही आशीष शुक्ला अब अफसर बनेगा। आशीष ने यूपी पीसीएस-2024 के परिणामों में 41वीं रैंक पाई है। पुलिस की आठ-आठ घंटे की कठिन ड्यूटी करने के बाद भी सफल हुए आशीष ने यह साबित कर दिया है कि ‘कोशिश करने वालों की कभी हार’ नहीं होती। पढ़ाई की लय न टूटे इसलिए आठ साल की नौकरी के दौरान उन्होंने ज्यादातर नाइट ड्यूटी की। ताकि दिन में पढ़ाई कर सकें। अब वह कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर बनेंगे। उनकी इस सफलता पर आलाधिकारियों ने उन्हें लड्डू खिलाकर मुंह मीठा कराया और आगे बढ़ने का आशीर्वाद दिया।
अमेठी के शुक्ल बाजार में रहने वाले आशीष शुक्ला की तैनाती बतौर सिपाही वर्ष 2018 में हुई थी। वर्तमान में वह पुलिस लाइन में थे, जबकि इससे पहले वह शहर के कई थानों में तैनात रह चुके हैं। उनके भाई अंकित शुक्ला भी समीक्षा अधिकारी बने हैं। बड़े भाई विवेक शुक्ला पुलिस में एसआई हैं। आशीष ने अपनी कामयाबी का श्रेय डीसीपी एसएम कासिम आबिदी, एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेक और एडीसीपी शिवा सिंह को दिया है।
यूपीएससी में तीन बार एल्युमिनेट हुए, आईपीएस ने बढ़ाया हौसला
आशीष बताते हैं कि यूपीएससी में तीन बार एल्युमिनेट होने के बाद पीसीएस की परीक्षा भी कई बार दे चुके थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके सर से मिलने गए। उन्हें बताया कि काम के तनाव में पढ़ाई नहीं हो पा रही। डिप्रेशन फील कर रहे हैं। आशीष के मुताबिक इसके बाद सर उन्हें एक कमरे में ले गए और बोले कि ‘तुम दिन में कम से कम तीन से चार घंटे भी रोजाना पढ़ाई करोगे तो सेलेक्शन हो जाएगा’। इसके बाद उन्होंने पर्याप्त छुटि्टयां भी दीं। आशीष बताते हैं कि लक्ष्य की चिंता में उनका वजन भी कम हो गया था।
जब भी उलझन हुई कविताओं का लिया सहारा
स्टैंडअप कविताएं सुनाने वाले आशीष ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं। प्रारंभिक शिक्षा अमेठी के नवोदय विद्यालय से हुई है। इग्नू से राजनीति विज्ञान में परास्नातक किया। पिछले सात सालों में कांस्टेबल पद पर गोविंदनगर, क्यूआरटी (क्विक रिस्पांस टीम) में कार्यरत रहे हैं। अधिकतर ड्यूटी नाइट में की है। इसका फायदा पढ़ाई में मिला। सुबह 4-5 बजे के बाद जब कमरे में आता था तो कविता-कहानियां लिखने के साथ ही पढ़ाई पर फोकस करता था।
डीसीपी वेस्ट ने समस्या सुन ट्रांसफर रोका
आशीष ने बताया कि एक दौर ऐसा भी आया जब पिता जी एडमिट थे। उस समय ट्रांसफर भी होने वाला था, तब डीसीपी वेस्ट कासिम आबिदी सर से समस्याएं बताईं। इसके बाद उन्होंने ट्रांसफर रोक दिया। जिस तरह अधिकारियों ने सहयोग किया, उसी कभी भूलेंगे नहीं।
आज अफसर बना तो पिता नहीं
आशीष ने बताया कि पिता लखनऊ यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए थे, वो 1970-80 दशक के बहुत अच्छे स्कॉलर थे। 1987 में उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो गया था, जिसके बाद गांव आ गए। केजीएमयू में भर्ती थे, हालांकि छह माह पहले उनकी मौत हो गई। आशीष ने कहते हैं कि ‘खुश हूं कि मेरा सलेक्शन हो गया, लेकिन पिता अफसर बनते नहीं देख पाए, इस बात का मलाल है। मैंने कांस्टेबल बनकर काफी कुछ फील किया है, कई बार हम लोग खाने के लिए भी परेशान होते हैं, जिन लोगों ने मुझे खाना खिलाया है, सफलता के बाद उन लोगों को भी धन्यवाद देने जाऊंगा’।
मैं यूपी पुलिस का हिस्सा रहा, इसके मुझे गर्व
आशीष ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली की तारीफ भी की। कहा कि ‘यूपी पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, यूपी पुलिस को बेस्ट विसेज कि ऐसे ही काम करती रहे। पुलिस में काफी सुधार हुआ है, मुझे गर्व है कि मैं यूपी पुलिस का हिस्सा रहा हूं, थैंक्यू यूपी पुलिस एंड गर्वमेंट ऑफ यूपी’।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।
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