Why the swing is cricket ball - पता चला : आखिर क्यों स्विंग होती है क्रिकेट की बाल DA Image

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पता चला : आखिर क्यों स्विंग होती है क्रिकेट की बाल 

क्रिकेट में बॉल के स्विंग होने की जानकारी देते आईआईटी कानपुर के प्रो. संजय मित्तल।

1 / 2क्रिकेट में बॉल के स्विंग होने की जानकारी देते आईआईटी कानपुर के प्रो. संजय मित्तल।

क्रिकेट में बॉल का स्विंग होना।

2 / 2क्रिकेट में बॉल का स्विंग होना।

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आईआईटी कानपुर के शोधार्थियों ने क्रिकेट मैच में स्विंग बाल विश्लेषण कर यह जानने की कोशिश की है कि किन कारणों से क्रिकेट में बॉल स्विंग होती है। छात्रों ने अपने अध्ययन में पाया है कि इन दिनों क्रिकेट में बल्लेबाजों का वर्चस्व बढ़ रहा है। वह अधिक रन बनाने लगे हैं। छात्रों ने इसे फिजिक्स के जरिए समझने की कोशिश की।
स्विंग को समझने के लिए आईआईटी के प्रो. संजय मित्तल, अंतरिक्ष अभियांत्रिकी विभाग ने दो छात्रों राहुल देशपांडे तथा रवि शाक्या के साथ मिलकर संस्थान के विंड टनल फैसेलिटी में इस प्रयोग को किया है। प्रो. संजय मित्तल की टीम ने प्रयोगात्मक अध्ययन से प्राप्त परिणामों को और अधिक सटीक बनाने के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडलिंग का भी उपयोग किया है। अध्ययन से यह समझने में आसानी हुई है कि बॉल को स्विंग कराने में बॉल की सीमा, उसकी गति, उसकी सतह का खुरदरापन और मौसम की क्या भूमिका होती है। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक खिलाड़ी और दर्शकों के बीच यह बात प्रचलित है कि नई गेंद से भी रिवर्स स्विंग किया जा सकता है। शोध में पाया कि जब बॉल की गति की दिशा में 20 डिग्री झुकाया जाता है तो बॉल 30 से 119 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्विंग होती है। गति 125 किमी/घंटा से ऊपर होने पर बॉल में रिवर्स स्विंग हो जाता है। यदि कोई बॉल 119 से 125 किमी प्रतिघंटे की गति से फेंकी जाती है तो उसकी ट्रेजेक्टरी के पहले भाग में रिवर्स स्विंग और इसके बाद स्वाभाविक स्विंग होती है। इसे लेट स्विंग के संदर्भ में भी समझा जा सकता है। मौसम की स्थिति के अनुसार बॉल की गति निर्धारित 
होती है।
रफनेस भी प्रभावित करती है
आईआईटी की शोध टीम ने स्विंग को लेकर सरफेस रफनेस के प्रभाव के अध्ययन के लिए उन बालों का भी अध्ययन किया, जिसे खिलाड़ी स्वयं अपने हाथों से खुरदरा बनाते हैं। उन्होंने पाया कि नई बॉल की तुलना में खुरदुरी बॉल धीमी गति से स्विंग करती है। 20 से 70 प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद में स्वाभाविक स्विंग होती है, जबकि 20 से 70 प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद में रिवर्स स्विंग। मतलब एक गेंदबाज को नई गेंद की तुलना में पुरानी गेंद से बल्लेबाज को आऊट करने में आसानी होती है। आधी खुरदुरी और आधी चमकदार बॉल पर भी प्रयोग किया गया। गेन्दबाजी करने वाली टीम के खिलाड़ियों द्वारा अक्सर इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

 

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  • Web Title:Why the swing is cricket ball