Kanpur News: इरिगेशन चैनल की दीवार फिर ढही, गंगा में गिरने लगा जहरीला पानी
Kanpur News: इरिगेशन चैनल की दीवार सोमवार रात पानी छोड़े जाने के बाद महज नौ घंटे में ढह गई, जिससे गंगा में जहरीला पानी गिरने लगा। प्योंदी गांव में गंदा पानी बहता रहा। जल निगम ने अब गंदे पानी को रोकने का कदम उठाया। नगर निगम का दावा है कि दीवार की मरम्मत 4 जुलाई को हो गई थी, पर हालात विपरीत हैं।

Kanpur News: इरिगेशन चैनल की दीवार सोमवार रात पानी छोड़े जाने के बाद महज नौ घंटे में मंगलवार सुबह फिर ढह गई, जिससे एक बार फिर गंगा में जहरीला पानी सीधे गिरने लगा। सुबह से लेकर शाम तक गंदा पानी प्योंदी गांव में बहता रहा। शाम करीब साढ़े छह बजे जल निगम ग्रामीण को नगर निगम ने शोधित जहरीला पानी इरिगेशन चैनल में न बहाने के लिए पत्र भेजा, तब कहीं जाकर गंदे पानी के कहर से प्योंदी गांव के लोगों को राहत मिल पाई। इरिगेशन चैनल की सड़क साइड की दीवार प्योंदी गांव में दो जुलाई को ढह गई थी, जिसके बाद 13 जुलाई की देर शाम तक जहरीला पानी गंगा में गिर रहा था। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने 8 जुलाई को मरम्मत का कार्य पूरा होने के बावजूद इरिगेशन चैनल में पानी न छोड़े जाने को लेकर नगर निगम और जल निगम ग्रामीण के अधिकारियों से सवाल पूछे, तो आनन-फानन में अफसरों ने जहरीले पानी को गंगा में गिराने के बजाय रात साढ़े 10 बजे इरिगेशन चैनल में छोड़ दिया था। सुबह होते ही प्योंदी गांव में उसी स्थान पर बाएं तरफ दीवार ढह गई। जल निगम ग्रामीण के अफसरों को ग्रामीणों ने सुबह साढ़े सात बजे दीवार टूटने की सूचना दी थी। जल निगम ग्रामीण के परियोजना प्रबंधक मोहित चक का कहना है कि नगर निगम को दीवार टूटने की सूचना तत्काल दे दी गई थी। चूंकि, पानी बंद करने का पत्र मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे मिला। लिहाजा, शाम सात बजे इरिगेशन चैनल में पानी को जाने से रोक दिया गया। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला शोधित जहरीला पानी एयरफोर्स नाले से गंगा में गिराया जा रहा है.
90 लाख लीटर प्रति घंटे गंगा में गिर रहा 'जहर'
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में घरेलू सीवरेज को शोधित करने के लिए डिजाइन है। चूंकि, घरेलू नाले में टेनरियों का जहरीला पानी भी गिरता है, जिसे एसटीपी शोधित नहीं कर पाती हैं। लिहाजा, शोधित सीवरेज में घुलित क्रोमियम गंगा में गिर रहा है। स्लज में क्रोमियम की मौजूदगी शोधित सीवरेज में क्रोमियम का बड़ा प्रमाण भी है। 36, 45 और 130 एमएलडी एसटीपी के अलावा 20 एमएलडी कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से हर घंटे गंगा में 90 लाख लीटर जहरीला पानी गिर रहा है.
नगर निगम का दावा 4 जुलाई को बन गई थी दीवार
नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि दो जुलाई को इरिगेशन चैनल की दीवार टूटने के बाद मरम्मत कार्य चार जुलाई को पूरा कर लिया गया था। जबकि, जीपीएस आधारित फोटो में 8 जुलाई की शाम 4:27 बजे तक इरिगेशन चैनल की नई दीवार पर प्लास्टर कार्य होता दिख रहा है। नगर निगम के अधिकारियों ने जारी पत्र में बताया है कि 6 जुलाई को जल निगम ग्रामीण को इरिगेशन चैनल में पानी छोड़ने के लिए लिखित पत्र दे दिया गया था। जल निगम ग्रामीण के अफसरों का दावा है कि 13 जुलाई की देर शाम व्हाट्सएप पर पत्र प्राप्त हुआ, जो 6 जुलाई का था। इस बाबत नगर निगम को पत्र लिखकर आपत्ति जता दी गई है कि 6 जुलाई का पत्र 13 जुलाई को व्हाट्सएप से क्यों रिसीव कराया गया।


