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VIDEO: कानपुर को स्मार्ट बनाने वाला मेयर चाहिए

हिन्दुस्तान कार्यालय में अायोजित संवाद में जुटीं महिलाएं।

यह सौभाग्य की बात है कि शहर महिला मेयर चुनने जा रहा है। शक्तिस्वरूपा, मातृशक्ति में प्रबंधन की क्षमता होती है। बशर्ते वह उसे पहचाने और इच्छा शक्ति के साथ उसका इस्तेमाल करे। महानगर स्मार्ट सिटी की इमेज के लिए जूझ रहा है। ऐसे में ऐसे मेयर की जरूरत है जो निर्णायक की भूमिका में हो। शहर की प्रथम नागरिक ऐसी होना चाहिए जिसे हर वर्ग का दर्द पता हो। वह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करे। वह पढ़ीलिखी होने के साथ सामाजिक जुड़ाव वाली हो। कहीं ऐसा न हो पांच वर्ष तक वह फीता काटते ही रह जाए। यह सार शुक्रवार को सिविल लाइंस स्थित हिन्दुस्तान कार्यालय में आओ राजनीति करे की कड़ी में आयोजित ‘मेरा शहर मेरी सरकार’ संवाद में निकल कर आया।

शिक्षा, कला, व्यापार, समाजसेवा, व गृहकार्य में दक्ष महिलाओं के बीच हुए संवाद में सभी ने एक सुर में कहा कि बदले दौर में राजनीति के क्षेत्र में आ रही महिलाओं को पीछे से किसी चेहरे की जरूरत नहीं है। उनको अपनी क्षमताओं और दक्षता पहचान कर निर्णायक की भूमिका में आना होगा। प्रधान पति, पार्षद पति की पहचान से ऊपर उठना होगा। मंथन का आगाज करते हुए शिक्षिका डॉ.मृदुलिका तिवारी ने कहा कि प्रॉक्सी पालिटिक्स से उबरना होगा। हालात यह है कि शिक्षित महिलाएं तक पति के फैसलों को खुद पर थोप लेतीं हैं। उनको अपने को पहचानना होगा। वैचारिक ढंग से अपने को मजबूत करना होगा। पति के कहने पर वोट डालने का समय चला गया। मेयर ऐसी चुनने की जरूरत है जो फैसले लेकर काम करे। इसी क्रम में डॉ.आशा रानी पाण्डेय ने कहा कि मेयर पुरुष हो या महिला यह मायने नहीं रखता। नेतृत्व करने वाले में उस पद की नीतियों और कानून का ज्ञान होना चाहिए। उसे अपने अधिकार का इस्तेमाल आना चाहिए।

डा.सुनीता आर्या, डा.अर्चना दीक्षित ने शहर के लिए संवेदनशील मेयर की जरूरत बताई। उन्होंने गंदगी, कूड़ा, प्रदूषण जैसी तमाम समस्याओं के प्रति निष्क्रिय स्थानीय सरकार के पूर्व जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। डॉ.दया दीक्षित ने कहा कि बात पढ़े या अनपढ़ की नहीं है। अनपढ़ महिलाएं पूरी दक्षता से परिवार का प्रबंधन करती है। विज्ञान ने भी इस बात को स्वीकार किया है। मेयर महिला को बिना किसी दबाव में काम कर नजीर पेश करनी होगी। मनीषा मिश्रा, सरिता यादव, शालिनी ने संवाद का सिलसिला आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि महानगर को एक समझदार, योजनाबद्ध तरीके से काम करने की सोच रखने वाली मेयर की जरूरत है। वह योजनाबद्ध तरीके से काम करे। जीतने के बाद वह पद का वैभव न भोगकर काम करने के लिए दिन-रात जूझे। नेहा, मंजू अवस्थी ने शहर की समस्याओं का दर्द रखा।अलका भार्गव ने कहा कि मेयर चुनते समय प्रत्याशी का प्रोफाइल जरूर सामने रखे। जीत के बाद उससे हिसाब मांगने की आदत डालें। डीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ.गायत्री सिंह ने कहा कि मेयर को 40 से 50 लाख की आबादी के लिए काम करना है। बहुत ही मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। यह कांटो का ताज है। मेयर पुरुष या महिला हो, यहां की स्वास्थ्य, सुरक्षा और सफाई पर बहुत काम होना है। इन मुद्दों को लेकर चलने वाला ही जनप्रतिनिधि चाहिए। मधु भार्गव व निर्मल कपूर ने भी शहर की जरूरतों की फेहरिस्त रखते हुए सशक्त मेयर का चुनाव करने पर जोर दिया।

प्रॉक्सी पॉलिटिक्स से उबरे
महिला प्रत्याशी प्रॉक्सी पालिटिक्स से ऊपर उठे। पति या ससुर के नाम पर पहचानी जाने वाली महिलाएं खुद को बदलें। कभी-कभी ऐसा होता है कि दूसरे क्षेत्र में काम करने वाली महिला पति की पहचान से मैदान में आती है। उसमें दक्षता नेतृत्व की होती है। ऐसी प्रत्याशी को मजबूती से अपनी दक्षता को जनता के सामने रखना होगा। जनता को भी दक्षता परख कर चुनाव करना होगा। जीत के बाद के लोग कर्तव्य भूल जाते हैं। अधिकार न होने का रोना रोते हैं।

मेयर को बीच में बदलने का प्रस्ताव आए 
शहर में बनने वाली सरकार दलगत राजनीति से ऊपर उठकर होनी चाहिए। मेयर के कार्यकाल में निष्क्रियता होने पर उसे बीच में प्रस्ताव लाकर बदलने की सोच होनी चाहिए। महिला मेयर को अपनी छवि बनाने के लिए काम करना चाहिए। शीर्ष पर पहुंची महिला निचली सीढ़ी से ही ऊपर पहुंचती है। महिला मेयर को चाहिए कि वह इतने अच्छे से काम करे कि उसकी जरूरत प्रांत और केंद्र नेतृत्व को भी महसूस हो।

स्वास्थ्य, सुरक्षा, सफाई, शिक्षा पर काम हो 
महिलाओं ने एक सुर में कहा कि शहर में स्वास्थ्य, सुरक्षा, सफाई और शिक्षा चार प्रमुख क्षेत्र में काम करने की महती जरूरत है। महिला मेयर में इन मुद्दों के प्रति ज्यादा संवेदना होनी चाहिए। सेहत, शिक्षा, सफाई सीधे घरों से जुड़ी समस्याएं है। सुरक्षा महिलाओं की पहली जरूरत है।

मत लो इनकी धैर्य परीक्षा
डा.आशारानी पाण्डेय ने  काव्य पंक्ति ‘कसमें तो ये बहुत हुई, आखिर हर कसमों से कोई खास बात तो नहीं हुई, वादों के बदले में सब कुछ काम कराया जाएगा, मत लो इनकी धैर्य परीक्षा, क्रांति बिगुल बजाया जाएगा’ गुनगुनाई। उन्होंने यश्च विनयचोभौ यस्मिन सत्यं च सस्थितम् विक्रमश्च यथा दृष्ट: सा राजा देश कालवित अर्थात जिसमें नीति, विनय, सत्य, पराक्रम, बुद्धि तथा देशकाल के तत्व को जानने की क्षमता हो वहीं राजा देश के लिए हितकर होता है, से जोड़कर मेयर की भूमिका की जरूरत पर पर प्रकाश डाला।

  • मंथन के मोती
  • आवारा पशुओं की समस्या दूर हो, ये जानलेवा बनते जा रहे हैं।  
  • कूड़ा जलाने पर रोक हो, इससे शहर की आबो-हवा बिगड़ चुकी है। 
  • पॉलीथिन का प्रयोग पूरी तरह से बंद होना चाहिए।
  • मेयर चुनने के बाद वार्ड स्तर पर चौपाल लगे। जनता की जरूरतों को समझा जाए। 
  • पुस्तकालय, झूलाघर जैसी योजनाएं चलाई जाए।
  • लगातार कई दिन की छुट्टियों पर सफाई व्यवस्था बंद न की जाए।
  • शहर को ज्यादा से ज्यादा हरभरा रखने को योजनाएं और जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है।
  • मेयर कुछ ऐसा काम करे कि किसी दूसरे देश या प्रांत में जाए तो यहां की नजीर दी जाए। 
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