Kanpur News: शुक्लागंज रेलवे क्रॉसिंग पर फोरलेन आरओबी की कवायद तेज

हिन्दुस्तान, कानपुर
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Kanpur News: कानपुर में शुक्लागंज से जुड़ने वाले निर्माणाधीन गंगापुल के आगे रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने का कार्य शुरू हुआ है। पुराना गंगा पुल टूटने के बाद नई कनेक्टिविटी के लिए यह जरूरी है। रेलवे ने सर्वे पूरा किया है और प्रशासन इसकी सिफारिश कर रहा है।

Kanpur News: शुक्लागंज रेलवे क्रॉसिंग पर फोरलेन आरओबी की कवायद तेज

Kanpur News: कानपुर। कानपुर को शुक्लागंज से जोड़ने वाले निर्माणाधीन गंगापुल के आगे रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे पुल बनाने की कवायद तेज हुई है। बिना आरओबी के फोर लेन पुल का फायदा न मिल पाने की आशंका के तहत प्रशासनिक अफसरों और जनप्रतिनिधियों की शासन में पैरवी का असर हुआ है। रेलवे की टीम ने रेलवे ओवरब्रिज बनाने का सर्वे करने के बाद डीआरएम लखनऊ को रिपोर्ट दी है। इसमें रेलवे के सिग्नल समेत अन्य विभागों का सर्वे कराने की सिफारिश की गई है। अभी लखनऊ से कानपुर आने जाने वाले शुक्लागंज रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से घंटों परेशान होते हैं। लखनऊ-कानपुर रेल मार्ग की मुख्य लाइन पर क्रॉसिंग पर 53 जोड़ी ट्रेनें और मालगाड़ियों की वजह यह गेट 24 घंटे में 10 घंटे बंद रहता है। पुराना गंगा पुल जब चालू था, तब भी क्रॉसिंग गेट बंद होने से लंबा जाम लगता था क्योंकि शुक्लागंज साइड में उतरते ही लखनऊ या उन्नाव जाने वाले रास्ते में 180 मीटर दूरी पर रेलवे क्रॉसिंग है। अब नए पुल में यह समस्या पैदा न हो, इसके लिए आरओबी जरूरी है। इस पुल की जरूरत पर आपका अपना अखबार ‘हिन्दुस्तान’ लगातार इसे प्रमुखता से उठा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, सांसद रमेश अवस्थी, उन्नाव विधायक पंकज गुप्ता ने मुख्यमंत्री और कानपुर के मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को लिख चुके हैं। पुराना गंगा पुल टूटने के बाद 235 करोड़ रुपये से नया पुल बन रहा है। सेतु निगम ने गंगा पुल के साथ ही शासन को पुल के साथ आरओबी का प्रस्ताव दिया था। 147 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बना था लेकिन इसकी मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इसलिए इसे बनाने की कवायद हो रही है。

यह है मौजूदा हालात

शुक्लागंज की तरफ पुल के छोर से रेलवे क्रॉसिंग 180 मीटर पर है। सेतु निगम ने गंगा पुल के साथ ही रेलवे क्रॉसिंग पर 147 करोड़ की अनुमानित लागत से 700 मीटर लंबा फोर लेन पुल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा। इस क्रॉसिंग से रोजाना 53 जोड़ी ट्रेनें और 25 से 30 मालगाड़ियां गुजरती हैं। इससे यह क्रॉसिंग 24 में 10 घंटे तक प्रतिदिन बंद रहती है। शासन ने 235 करोड़ रुपये से गंगा नदी पर 1200 मीटर लंबे फोर लेन नये गंगा पुल को स्वीकृत कर दिया है। जिसका काम चल रहा है।

गंगा पुल की स्थिति

2021 में पुराने गंगा पुल पर ट्रैफिक बंद होने से कनेक्टिविटी का इकलौता पुल हो गया है। इससे दोनों तरफ का ट्रैफिक शिफ्ट हुआ तो जाम झाड़ी बाबा पड़ाव आरओबी तक लग जाता है। अब सेतु निगम नया गंगा पुल बनवा रहा है, जो कि क्षतिग्रस्त पुराने गंगा पुल से 50 मीटर बगल में है। लेकिन पहले की तरफ ट्रैफिक को रेलवे क्रॉसिंग को पार करना होगा और बिना आरओबी के जाम लगता रहेगा।

रेलवे क्रॉसिंग का सर्वे

रेलवे की टीम ने शुक्लागंज में रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज बनाने के लिए सर्वे कर रिपोर्ट डीआरएम को दी है और रेलवे के सभी विभागों के साथ संयुक्त सर्वे की सिफारिश की है। सेतु निगम ने भी आरओबी की जरूरत का प्रस्ताव शासन को भेज चुका है।

- एसके सुमन, डीपीएम, यूपी राज्य सेतु निगम, कानपुर

सामान्य प्रश्न

✦कानपुर में रेलवे ओवरब्रिज बनाने का कारण क्या है?−
कानपुर में रेलवे ओवरब्रिज बनाने का कारण यह है कि बिना आरओबी के फोर लेन पुल का फायदा नहीं मिल पाएगा और रेलवे क्रॉसिंग पर जाम की समस्या बनी रहेगी।
Suhail Khan

लेखक के बारे में

Suhail Khan

शॉर्ट बायो : सुहेल खान पिछले 17 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में हिन्दुस्तान' में डिफेंस सेक्टर, ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और पॉलिटिकल खबरों को कवर कर रहे हैं।


परिचय एवं अनुभव

सुहेल खान भारतीय मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में पॉवर सेक्टर, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पॉलिटिकल और डिफेंस सेक्टर की खबरों को लीड कर रहे हैं। 2024 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।


करियर का सफर (प्रिंट से डिजिटल)

सुहेल खान ने अपने करियर की शुरुआत 2009 में अमर उजाला जैसे प्रमुख अखबार से की, जहां उन्होंने प्रिंट पत्रकारिता की बुनियादी समझ विकसित की। लंबे समय तक अमर उजाला में रहते हुए रेलवे, परिवहन सेवाएं, ऊर्जा क्षेत्र और राजनीति समेत कई प्रमुख बीटों पर काम करते हुए राष्ट्रीय स्तर की एक्सक्लूसिव खबरों की कवरेज की। 2024 की शुरुआत में अमर उजाला के बाद ‘हिन्दुस्तान’ से जुड़े और वर्तमान में डिफेंस बीट की राष्ट्रीय खबरों के साथ राजनीति, ऊर्जा, ईपीएफओ और इन्फ्राट्रक्चर बीटों की प्रमुख खबरों को लीड कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और तकनीकी रिपोर्टिंग

B.Sc और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट होने के कारण सुहेल को विज्ञान और पत्रकारिता का अनूठा संयोजन मिला। इसी वजह से वह डिफेंस, रेलवे और पॉवर बीट पर कमांड होने के साथ तकनीकी से जुड़े विषयों पर स्टोरीज़ लिख रहे हैं।


डिफेंस और पब्लिक कनेक्ट विजन

डिफेंस सेक्टर की खबरों की सुहेल को गहरी समझ है। उन्होंने आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, एचएएल के अलावा डीआरडीओ-डीएमएसआरडीई और ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के रक्षा उत्पादों के विकास और शोध के बारे में कई राष्ट्रीय स्तर की खबरें लिखीं। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा संवदेनशील सेक्टर होने से डिफेंस की खबरों को लिखने में बरती जाने वाली सावधानियों पर उनकी गहरी समझ है। इस भूमिका को सुहेल ने बखूबी निभाया और देश की सशस्त्र सेनाओं का मनोबल बढ़ाने वाली, उनकी जरूरतों से जुड़े उत्पादों और डिफेंस रिसर्च की एक्सक्लूसिव खबरें लिखी हैं। रक्षा क्षेत्र के अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं। इसके अलावा वह ऊर्जा, रेलवे, ट्रांसपोर्टेशन, ईपीएफओ और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी खबरों के ज़रिये पब्लिक कनेक्ट का विजन रखते हैं। सुहेल का मानना है कि पत्रकारिता की नींव तथ्यपरकता और विश्वसनीयता है—उनका लक्ष्य पाठकों को सटीक, प्रमाणिक और सशक्त जानकारी देना है।


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