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7 अप्रैल, 2020|3:06|IST

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कैंसर-टीबी के नए मरीजों की जान पर आफत, राहत नहीं

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कैंसर-टीबी और अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित नए लोगों की जान पर आफत है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी बंद है। कई सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं भी नहीं हैं, ऐसे में मरीज भटक रहे हैं। मरीजों को न तो कोई इलाज मिल रहा है और न ही कोई चिकित्सीय सलाह मिल रही। पुराने मरीजों की कीमोथेरपी और रेडियोथेरेपी जिनकी पूर्व में ही तिथि निर्धारित हो चुकी थी उन्हें ही लाभ मिल रहा।

स्वास्थ्य विभाग ने इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए हैं। कैंसर और टीबी के लगभग 500 मरीज रोजाना सिर्फ दो अस्पतालों में देखे जा रहे थे। चेस्ट अस्पताल और कैंसर संस्थान यह दो अस्पताल रेफरल सेंटर थे। सभी मरीज रेफर होकर आ रहे थे। इनमें सभी नए मरीज होते थे। अब ऐसे मरीज भटक रहे हैं। उनके लिए राहत की कोई व्यवस्था नहीं है। चेस्ट अस्पताल में बिल्हौर से आए मरीज दिनकर प्रसाद ने कहा कि वह सुबह चार बजे ही चल दिए, 10 दिन पूर्व बिल्हौर में टीबी का इलाज करने की सलाह दी गई थी। उसी के लिए चेस्ट अस्पताल आए थे। मगर यहां ओपीडी बंद है। वैसे इन दोनों अस्पताल में जिन रोगियों को फालोअप का समय दिया गया था, उस पर मरीज पहुंच नहीं पा रहे। जेके कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो. एसएन प्रसाद का कहना है कि रेडियोथेरेपी और कीमोथेरपी जिसकी प्लान थी उसे तय समय पर दी जा रही है। नए लोगों को नहीं शामिल किया जा रहा है। यह मजबूरी है। सोशल डिस्टेंट बनाना है। प्रो. प्रसाद का कहना है कि मरीज कीमो व रेडियोथेरेपी के लिए आएं मगर अपने साथ सिर्फ एक तीमारदार लाएं।

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  • Web Title:Trouble on new life of cancer-TB patients no relief