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कानपुरनकारात्मक को सकारात्मक रूप देते हैं कला और संगीत

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरPublished By: Newswrap
Sat, 24 Mar 2018 11:19 PM
नकारात्मक को सकारात्मक रूप देते हैं कला और संगीत

कला और संगीत। एक ऐसा माध्यम है जो नकारात्मक सोच को सकारात्मक में बदल देता है। निर्जीव वस्तुएं भी बोलने लगती हैं। तनाव कोसो दूर भाग जाता है। यह बात पद्मश्री शोभना नारायण ने कही। उन्होंने कहा कि जो कला व संगीत की अहमियत को समझ गया, उससे सफलता दूर नहीं भाग सकती।

भौंती स्थित पीएसआईटी के ऑडीटोरियम में एक दिवसीय टेडेक्स का आयोजन हुआ। शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों के साथ संस्थान के निदेशक प्रणवीर सिंह व प्रबंध निदेशक शेफाली राज ने किया। कार्यक्रम में शिरकत करने आई शोभना ने युवाओं के साथ खुलकर संवाद किया। उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए अगर जिंदगी में कला व संगीत न हो, तो जीवन कैसा होगा। उन्होंने अपने अनुभवों को भी साझा किया। करीब पौन घंटे तक चले संवाद के बाद शोभना ने कथक डांस के जरिये द्रोपदी के चरित्र को उजागर किया। उन्होंने कहा कि दुश्शासन मतलब बुरे लोग अब भी जीवित हैं। द्रोपदी की तरह उन्हें भगाना होगा। शोभना को 1992 में पदमश्री मिला है।

कार्यक्रम में वेद कृष्णा ने उत्पादों की पैकेजिंग को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया। एनवडी कैन पेंट के फाउंडर समीर व मिस हर्षा नेगी ने एक कहानी के जरिये बच्चों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर प्रतिभा छिपी होती है, उसे निखारने की जरूरत है। डॉ. जय मदान ने वास्तुशास्त्र से जुड़ी छात्रों की जिज्ञासा को शांत किया। छोटे-छोटे लक्ष्यों को प्राप्त कर बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। कोई भी समय बुरा नहीं होता। जब आप चाह लो, अच्छे समय की शुरुआत हो सकती है। पूर्णिमा वर्मा ने अपनी कहानी के जरिये युवाओं को सुझाव दिया। कर्नल शिशिर कुमार ने असफलता को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए संयम रखना जरूरी है। अंजली पुस्तकालय के संस्थापक जयश्री गोयल ने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उसे अच्छे से समझा है। वर्तमान में इस पुस्तकालय का छात्र लाभ ले रहे हैं। डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि तनाव से दूर रहना चाहिए। तनाव से ही अधिकतर बीमारियां होती हैं। इस मौके पर नीति प्रकाश, प्रणव कुमार, अनीला खालिद आदि मौजूद रहे।

हर अपराधी के पीछे छिपी होती है एक कहानी : क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट अनुजा कपूर ने कहा कि अपराधी को केवल अपराधी नहीं समझना चाहिए। वह भी इंसान है और इसे इसी नजर से देखना चाहिए। कोई भी इंसान तभी अपराधी बनता है, जब उसे लोग खराब दृष्टि से देखने लगते हैं। कोई भी अपराधी जन्म से अपराधी नहीं होता है, उसे समाज के लोग अपराधी बनाते हैं। अगर अपराधी के पीछे की कहानी को समझ कर उस पर काम किया जाए तो अपराध कम किया जा सकता है।

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