एक सदी पुराना संस्कृत विद्यालय बदहाल, अब 25 लाख से जगी सुधार की उम्मीद
Kanpur News - कानपुर देहात के कहिंजरी में 1914 में स्थापित श्री कृष्ण संस्कृत विद्यालय की पहचान खत्म हो रही है। विद्यालय की देखरेख के अभाव में बच्चों और शिक्षकों के लिए बैठने की जगह नहीं है। हाल में 25 लाख की धनराशि स्वीकृत होने से विद्यालय की बदहाली में सुधार की उम्मीद जगी है।
रसूलाबाद तहसील क्षेत्र के कहिंजरी में वर्ष 1914 में स्थापित श्री कृष्ण संस्कृत विद्यालय की पहचान अब मिटती जा रही है। यहां से शिक्षा ग्रहण कर तमाम विद्वान बाहर प्रदेशों में परचम लहरा रहे हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में सैकड़ों साल पुराने इस विद्यालय में बच्चों व शिक्षकों के बैठने तक की जगह नहीं बची है। इससे यहां नीम के पेड़ की छांव में पढ़ाई होती है। अब 25 लाख की धनराशि स्वीकृत होने से बदहाली दूर होने की उम्मीद बन रही है। कहिंजरी में श्री कृष्ण संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1914 में सेठ रामनारायण वैश्य ने कराई थी।
विद्यालय का संचालन शुरू होने के बाद स्थानीय बच्चों के अलावा बाहरी जिलों से भारी संख्या में लोग आचार्य, शास्त्रीय की पढ़ाई करने आते थे। बाहरी बच्चों को खाना बनाने के लिए सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती थी।सेठ ने करीब सौ बीघा जमीन भी विद्यालय में लगाई थी। जमीन से होने वाली आमदनी से छात्रों का खर्च चलता था।कई साल बाद सरकार ने मान्यता देकर शिक्षकों की तैनाती कर दी। यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले तमाम लोग आज बाहरी प्रदेशों में परचम लहरा रहे हैं लेकिन शिक्षा देने वाला विद्यालय अपना अस्तित्व बचाने में जूझ रहा है। कई सालों से भवन पूरी तरह गिर चुका है।
शिक्षक विधायक राजबहादुर सिंह चंदेल ने दुर्दशा देखकर अपनी निधि से एक कक्ष का निर्माण कराया लेकिन अब वह भी कमजोर हो गया है। शिक्षक व बच्चों के लिए बैठने तक की जगह न होने से तैनात शिक्षक बगल में एक पेड़ की छाया में बैठकर ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। कागजों पर कुछ बच्चों का प्रवेश चल रहा है लेकिन उन्हें शिक्षा कतई नहीं मिल पा रही है। शिक्षक राकेश शुक्ला ने बताया कि हाल में विद्यालय निर्माण के लिए शासन से 25 लाख रुपए स्वीकृत हुआ है। उम्मीद है कि जल्द विद्यालय की बदहाली में सुधार होगा।

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