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कानपुर संसदीय क्षेत्र से आज तक जीत हासिल नहीं कर सकी सपा

कानपुर, संजय पाण्डेय। ‘इंडिया गठबंधन में सपा ने कानपुर और झांसी-ललितपुर संसदीय सीट...

कानपुर संसदीय क्षेत्र से आज तक जीत हासिल नहीं कर सकी सपा
हिन्दुस्तान टीम,कानपुरThu, 22 Feb 2024 11:55 AM
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कानपुर, संजय पाण्डेय।

‘इंडिया गठबंधन में सपा ने कानपुर और झांसी-ललितपुर संसदीय सीट यूं ही कांग्रेस के लिए नहीं छोड़ी। हकीकत यह है कि इन दोनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का दावा ज्यादा मजबूत था। कानपुर संसदीय सीट आज तक सपा जीत नहीं सकी। वर्ष 1952 में हुए पहले चुनाव में इस सीट से विजय का स्वाद कांग्रेस ने ही चखा था। यह अलग बात है कि इसके बाद चार बार निर्दलीय और एक बार भारतीय लोकदल ने जीत हासिल की थी। इसके बाद कांग्रेस इस सीट से पांच बार यानि कुल छह बार जीत चुकी है। अगर झांसी-ललितपुर सीट की बात करें तो वर्ष 1951 से अब तक नौ बार कांग्रेस की झोली में जीत गिरी है। सिर्फ एक बार ही सपा यहां से जीत हासिल कर सकी।

कानपुर की सीट पर कांग्रेस की स्थिति

वर्ष 1980 में जब से कांग्रेस का इस सीट पर दोबारा कब्जा हुआ तो दो लोकसभा चुनावों तक चला। लंबे समय बाद कांग्रेस के आरिफ मोहम्मद खान ने यह सीट जीती थी। इसके बाद वर्ष 1984 में नरेश चंद्र चतुर्वेदी कांग्रेस से सांसद बने। वर्ष 1989 में सीपीआई एम की सुभाषिनी अली ने विजय हासिल जरूर की मगर अगले दो लोकसभा चुनाव तक जगतवीर सिंह द्रोण जीते जो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। वर्ष 1999 से कांग्रेस ने फिर पलटी मारी और श्रीप्रकाश जायसवाल ने लगातार 2009 तक इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाई। यह अलग बात है कि वर्ष 2014 में डॉ. मुरली मनोहर जोशी और वर्ष 2019 में सत्यदेव पचौरी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में विजय पताका लहराई है। लगातार दो बार से यह सीट भाजपा के कब्जे में है मगर यह भी सही है कि रनर कांग्रेस ही रही है। सपा को कभी जीत हासिल नहीं हुई। यही वजह है कि इस सीट पर कांग्रेस का दावा ही गठबंधन में ज्यादा मजबूत था।

झांसी की सीट पर कांग्रेस की स्थिति

झांसी-ललितपुर संसदीय सीट पर वर्ष 1951 से 1971 तक लगातार कांग्रेस का ही कब्जा रहा। एक बार बीएलडी से सुशीला नैय्यर चुनाव जीती थीं जो कांग्रेस से ही यहां पूर्व में तीन बार सांसद रह चुकी थीं। इसके बाद लगातार दो बार फिर से कांग्रेस ने यह सीट कब्जाई। फिर चार बार लगातार भाजपा ने यहां जीत हासिल की। वर्ष 1999 में एक फिर कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला ने विजय पताका फहराई। वर्ष 2004 में सपा से चंद्रपाल सिंह यादव जीते। वर्ष 2009 में कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य ने सीट पर कब्जा किया। वर्ष 2014 में भाजपा से उमा भारती और वर्ष 2019 में भी भाजपा से ही अनुराग शर्मा यहां से विजयी हुए। यहां से छह बार भाजपा, नौ बार कांग्रेस और एक बार सपा ने जीत का स्वाद चखा है। जाहिर है इस सीट पर भी ज्यादा दावा कांग्रेस का ही था इसलिए गठबंधन में यह सीट कांग्रेस को ही मिली है।

धमाल मचाएगी-अखिलेश राहुल की जोड़ी

अखिलेश-राहुल की जोड़ी एक बार फिर प्रदेश में धमाल मचाएगी। कानपुर समेत प्रदेश की 17 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी। हम ये सारी सीटें जीतेंगे। कांग्रेस के साथ ही सपा कार्यकर्ताओं की मेहनत भी जीत सुनिश्चित करने के लिए रंग दिखाएगी।

- अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस

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