सीजन का सबसे सर्द रहा दिन, अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन
Kanpur News - कानपुर देहात में कडाके की सर्दी से लोग और पशु-पक्षी बेहाल हैं। रविवार को तापमान सामान्य से 7.5 डिग्री कम होकर 14.3 डिग्री पर पहुंच गया, जिससे यह सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। अलाव जलाने में कमी और कंबल वितरण की धीमी गति से गरीबों को अधिक परेशानी हो रही है।
कानपुर देहात। जनपद में मौसम बार बार करवट बदल रहा है। कडाके की सर्दी के चलते लोग जल्दी घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। रविवार को भी कोहरे व शीतलहर के साथ दिन शुरू हुआ। पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। दोपहर में पारा सामान्य से साढे़ सात डिग्री नीचे गिरने से इस सीजन का सबसे अधिक सर्द दिन रहा। कडाके की सर्दी में लोगों के साथ ही पशु-पक्षी बेहाल हो रहे हैं। पहाडों पर हो रही बर्फवारी सेजिले में कडाके की सर्दी हो रही है। इससे लोगों के साथ ही पशु-पक्षी बेहाल हो रहे हैं।
वहीं कोहरे व शीतलहर से लोगां की दिनचर्या बिगड़ गई है।शनिवार रात में पारा सामान्य से आधा डिग्री नीचे गिरकर 8.2 डिग्री रहा। वहीं ठंडी हवा लोगों को ठिठुराए रही। रविवार को कोहरे व कडाके की सर्दी के साथ दिन शुरू हुआ। इसके चलते अधिकांश लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। शीतलहर के चलते मार्निंग वॉक के लिए निकलने वालों की संख्या भी काफी कम रही। पूरे दिन आसामान में सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। दोपहर में पारा सामान्य से साढेसात डिग्री नीचे गिरकर 14.3 डिग्री पर पहुंच गया। जबकि दो किमी प्रति घंटा की रफ्तार ेसचलने वाली ठंडी उत्तर पश्चिमी हवा लोगों वराहगीरों को ठिइुराती रही। इससीज में रविवार का दिन सबसे अधिक ठंडा रहा। - छह साल बाद सबसे अधिक ठंडा रहा 28 दिसंबर सीएसए के मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्र ने बताया कि वर्ष 2019 में 28 दिसंबर को तपमान 12.6 डिग्री था। इसके छह साल बाद रविवार को अधिकतम तापमान सबसे कम 14.3 डिग्री रहा। उन्होने बताया कि अभी मौसम में कोई ख़ास बदलाव नहीं होगा। सुबह-शाम व रात में कोहरा पड़ने व शीत लहर जारी रहने की संभावना है।उन्होने फसलों को नुकसान से बचाने के लिए किसानों से हल्की सिंचाई करने तथा सौ लीटर पानी में 10 मिली सल्फ्यूरिक एसिड के घोल का छिड़काव करने की भी सलाह दी। -नहीं जल रहे अधिकांश अलाव,कंबल वितरण की धीमी रफ्तार बदले मौसम में सबसे अधिक परेशानी बेसहारा, गरीबों व राहगीरों को हो रही है। सरकारी आंकड़ों में तहसीलों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र मे 49 व नगरीयक्षेत्रों में 101 अलाव जल रहे हैं, लेकिन हकीकत में धन उपलब्ध होने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र के अलाव कागजों में ही गर्मी दे रहे हैं। जबकि नगरीय क्षेत्रों में भी प्रमुख चौराहों पर अलाव जल रहे हैं। इससे लोग कूड़ा करकट जलाकर सर्दी से बचने का प्रयास करने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं कंबल वितरण की रफ्तार भी धीमी होने से गरीब व बेसहारा सर्दी में ठिठुर रहे हैं ।

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