थाली से गायब प्रोटीन कम उम्र में बना रहा डायबिटीक
Kanpur News - थाली से गायब प्रोटीन कम उम्र में बना रहा डायबिटीक थाली से गायब प्रोटीन कम उम्र में बना रहा डायबिटीक थाली से गायब प्रोटीन कम उम्र में बना रहा डायबिटीक

कानपुर। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों ने मधुमेह के खतरे को तेजी से बढ़ा दिया है। थाली से धीरे-धीरे गायब होता प्रोटीन शुगर बढ़ने का एक बड़ा कारण बन रहा है। कार्बोहाइड्रेट और वसा से भरपूर भोजन, लेकिन प्रोटीन की कमी, शरीर में ब्लड शुगर को असंतुलित कर रही है। प्रोटीन न सिर्फ मांसपेशियों को मजबूत करता है, बल्कि ब्लड शुगर को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। कानपुर डायबिटीज एसोसिएशन के केडीएकॉन 2025 में जुटे देशभर के मधुमेह विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। कैंट में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन वाराणसी के डॉ. आशुतोष मिश्र बताते हैं कि शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों वर्गों में प्रोटीन की कमी आम हो गई है।
दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, अंडा और मछली जैसे प्रोटीन स्रोत थाली से कम होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर इंसुलिन की कार्यक्षमता पर पड़ता है। हर मुख्य भोजन में प्रोटीन को शामिल किया जाए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. रितेश चौधरी, डॉ. विपिन श्रीवास्तव, डॉ. प्रीति आहूजा आदि रहे। किडनी खराब होने का 40 फीसदी कारण : लखनऊ के डॉ. राजकुमार शर्मा कहते हैं कि डायबिटीज यानी शुगर अब उम्र की सीमा तोड़ चुकी है। जिस बीमारी को कभी बुजुर्गों से जोड़ा जाता था, वही अब 25 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं में किडनी खराब होने की 40 फीसदी वजह बनती जा रही है। कई मरीजों को कम उम्र में ही डायलिसिस तक की नौबत आ रही है। फास्ट फूड, मीठे पेय, शारीरिक गतिविधि की कमी, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। साथ ही युवा वर्ग में शुगर की नियमित जांच न होना भी स्थिति को गंभीर बना रहा है। डॉ. एके सिंह ने बताया कि 30 वर्ष की उम्र के बाद शुगर और किडनी की जांच नियमित रूप से कराई जाए। समय पर जांच और नियमित फॉलोअप जरूरी : केडीएकॉन में मुंबई की डॉ. पूवीं चावला ने बताया कि शुगर को लेकर तमाम भ्रम भी समाज में फैले हैं। यही बड़ा कारण है कि शुगर तेजी से बढ़ रही है। मीठा खाने को लोग शुगर का कारण मानते हैं, वहीं इसे बुढ़ापे की बीमारी आजतक माना जाता है। अब 25–35 साल के युवाओं में भी शुगर तेजी से बढ़ रही है। कई तो यह सोचते हैं कि दवा अगर शुरू कर दी तो जिंदगी भर खानी पड़ेगी। सही समय पर जीवनशैली सुधारने से दवाओं की जरूरत कम या नियंत्रित की जा सकती है। वह कहती हैं कि शुगर से ज्यादा खतरनाक है, इसको लेकर फैला भ्रम। समय पर जांच और नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी है। इन शहरों से भी आए मधुमेह विशेषज्ञ : कोलकाता से डॉ. सुजॉय मजूमदार, जमशेदपुर से डॉ. अनिल वीरमणि, लखनऊ से डॉ. राजेंद्र अवस्थी, भोपाल से डॉ. पीसी मनोरिया, जयपुर से डॉ. राकेश पारीक, इंदौर से डॉ. प्रदीप गुप्ता समेत कई शहरों के डॉक्टर कार्यक्रम में पहुंचे। ----------- इन प्रमुख तथ्यों पर ध्यान दें : 04 गर्भवतियों में से एक शुगर की चपेट में 10 साल पहले छह में से एक थी डायबिटीक 788 डॉक्टरों ने केडीएकॉन में कराया रजिस्ट्रेशन
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