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रिजल्ट घोषित : पीसीएस में चमकी कानपुर की मेधा

शहर की मेधाओं ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है। पीसीएस के परीक्षा परिणाम में शहर के बेटे-बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। गुरुवार को पीसीएस 2017 का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। रिजल्ट आते ही छात्र-छात्राओं के चेहरे खिल उठे। 


शहर की उत्कर्ष एकेडमी के अभ्यर्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। डिप्टी एसपी पद पर अंबुजा त्रिवेदी को दूसरी रैंक मिली है। इसी तरह अरुण दीक्षित, संतोष कुमार सिंह व रवि कुमार का डिप्टी एसपी पद पर चयन हुआ है। इसी तरह अपर्णा सैनी का बीडीओ पद पर चयन हुआ है। नेहा राजवंशी, विजय कुमार गुप्ता का नायब तहसीलदार, हर्षित श्रीवास्तव का कामर्शियल टैक्स ऑफिसर, मुकेश कुमार का सांख्यिकी अधिकारी, संतोष कुमार तिवारी का मालकर-यात्रीकर अधिकारी पद पर हुआ है। एकेडमी के निदेशक डॉ. प्रदीप दीक्षित के साथ सभी चयनित अभ्यर्थियों ने ढोल पर नाचकर जश्न मनाया। 


वहीं एपेक्स एकेडमी के छात्र शिखर का नायब तहसीलदार, बलवंत कुमार उपाध्याय का नायब तहसीलदार, अवधेश कुमार कौशल का जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी, इंदू का सहायक रजिस्ट्रार पद पर चयन हुआ है। संस्थान के निदेशक देवीशंकर तिवारी ने सभी को बधाई दी है। 

बेटियों को भयमुक्त करना चाहती हैं अंबुजा
मंगला विहार में रहने वाले सोम प्रकाश त्रिवेदी एयरफोर्स से रिटायर हैं। वे वर्तमान में बिल्डिंग मैटेरियल का व्यापार कर रहे हैं। सोम प्रकाश और रीता की तीन बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी अंबुजा त्रिवेदी ने लगातार दूसरी बार पीसीएस परीक्षा पास कर डिप्टी एसपी बन गई हैं। अंबुजा ने कहा कि पूरे परिवार ने विश्वास करते हुए बेटियों को बेटे के समान दर्जा देते हुए पढ़ाया-लिखाया। अब डिप्टी एसपी बनकर परिवार को इसका उपहार दिया है। अंबुजा ने केंद्रीय विद्यालय से इंटर की पढ़ाई करने के बाद छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के यूआईईटी से बीटेक की डिग्री ली। फिर गोरखपुर स्थित एमएमएमयूटी से एमटेक की पढ़ाई की। वर्ष 2016 की पीसीएस की परीक्षा क्वालीफाई करते हुए जिला प्रशासनिक अधिकारी के पद पर चयन हुआ था। इसी समय उत्तराखंड की पीसीएस परीक्षा 2016 भी दी थी। इसमें भी सफलता मिली और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पद पर चयन हुआ। अभी तक इसमें ज्वाइनिंग नहीं मिली है। वर्ष 2017 की परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की और डिप्टी एसपी पद मिला है। अंबुजा ने कहा कि वे बेटियों को भयमुक्त करना चाहती हैं। ऐसी योजना बनाना प्राथमिकता होगी, जिससे छेड़खानी, महिला उत्पीड़न जैसी घटनाएं खत्म हो। पुलिस को लड़कियों को मित्र बनाने का प्रयास रहेगा। हालांकि अंबुजा आईएएस बनना चाहती हैं। वर्ष 2019 की परीक्षा भी दी है। 

साइबर ठगी को रोकना ही अरुण का लक्ष्य 
अशोक नगर के रहने वाले स्व. नरेंद्र कुमार दीक्षित और सुनीता दीक्षित के बेटे अरुण दीक्षित ने पीसीएस क्वालीफाई कर डिप्टी एसपी बन गए हैं। अरुण ने बताया कि साइबर ठगी को रोकना ही मेरा मकसद है। सुनीता दीक्षित गृहिणी हैं। तीन भाई बहन में सबसे बड़े अरुण ने महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया। फिर एमआईटीएस ग्वालियर से एमटेक किया। इसके बाद अरुण डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर हैंडीकैप्ड में पढ़ाने लगे। अरुण ने कहा कि तीन साल तक पढ़ाने के बाद लगा कि उसकी क्षमता के अनुसार यह काम नहीं है। फिर एक दिन फैसला लिया और जॉब छोड़ कर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। पीसीएस क्वालीफाई किया है। अरुण ने बताया कि आईएएस बनना ही लक्ष्य है। हालांकि डिप्टी एसपी पद से भी संतुष्ट हूं। अरुण के छोटे भाई विमल दीक्षित पीएसआईटी कॉलेज में शिक्षक हैं और छोटी बहन अंजू दीक्षित ने बीएससी पास किया है। 

मोबाइल से दूर हर्षित ने पीसीएस क्वालीफाई कर बढ़ाया मान
नवाबगंज के रहने वाले विनोद कुमार श्रीवास्तव आर्डिनेंस फैक्ट्री से रिटायर हैं। विनोद और अल्पना के बेटे हर्षित श्रीवास्तव पीसीएस क्वालीफाई कर कामर्शियल टैक्स ऑफिसर बन गए हैं। हर्षित ने कहा कि वे वर्ष 2016 से सोशल मीडिया से दूर हैं और दो वर्ष से मोबाइल का प्रयोग नहीं करते हैं। हर्षित की मां अल्पना श्रीवास्तव गृहिणी हैं। हर्षित के भाई अश्विनी एक प्राइवेट कंपनी में जनरल मैनेजर हैं। हर्षित ने भोपाल से बीटेक किया। इसके बाद मुंबई की एक कंपनी में असिस्टेंट एनालिस्ट की जॉब करने लगे। हर्षित ने बताया कि यह पहला अटेंप्ट था। हालांकि अभी आईएएस बनने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के हरिद्वार डीएम दीपक रावत से काफी प्रभावित हैं। उनकी कार्यशैली बहुत अच्छी है। फिलहाल शिक्षा व स्वास्थ्य पर काम करना है और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के स्तर में सुधार लाना है। 

एसडीएम कोर्ट के क्लर्क की बेटी अपर्णा बनीं बीडीओ
बिल्हौर के वैष्णव नगर में रहने वाले शिव गोपाल सैनी एसडीएम बिल्हौर कोर्ट में क्लर्क हैं। शिव गोपाल व जानकी की बेटी अपर्णा पीसीएस क्वालीफाई कर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) बन गई हैं। दो भाई और दो बहन में सबसे बड़ी अपर्णा ने बिल्हौर इंटर कॉलेज से 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की। फिर राम सहाय राजकीय महाविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। 2015 में इतिहास से एमए करने के साथ नेट क्वालीफाई किया। अपर्णा ने कहा कि पापा ने हमेशा ही प्रमोट किया है। उनके ही प्रोत्साहन की देन है कि यह सफलता मिली है। अपर्णा ने कहा कि उसका लक्ष्य आईएएस बनना है। इसकी तैयारी कर रहे हैं। 

मुख्य टिकट निरीक्षक का बेटा बना डिप्टी कलेक्टर
कैंट में रहने वाले वीरेंद्र चौधरी कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर मुख्य टिकट निरीक्षक हैं। वीरेंद्र के छोटे बेटे मानवेंद्र सिंह ने लगातार दूसरी बार पीसीएस परीक्षा क्वालीफाई की है। मानवेंद्र का चयन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुआ है। उन्होंने पिछली बार भी पीसीएस क्वालीफाई किया था और उन्हें लेबर कमिश्नर पद मिला था। वर्तमान में वे गाजियाबाद में सहायक श्रम आयुक्त पद पर कार्यरत हैं। मानवेंद्र ने बताया कि डॉ. वीरेंद्र स्वरुप एजुकेशन सेंटर से इंटर की परीक्षा पास की थी। तब उन्होंने यूपी टॉप किया था। इसके बाद आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री ली। मानवेंद्र के बड़े भाई अजीत सिंह फिरोजाबाद में सिविल जज हैं। मानवेंद्र ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना चाहते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बड़े भाई को दिया है। 

शहर की बेटी थी एसडीएम, दामाद बने डिप्टी एसपी
गुमटी नंबर पांच में रहने वाली जयजीत कौर लखनऊ में एसडीएम हैं। जयजीत के पति और शहर के दामाद आशुतोष मिश्रा पीसीएस क्वालीफाई कर डिप्टी एसपी बन गए हैं। जयजीत की शादी वर्ष 2014 में आशुतोष मिश्रा से हुई थी। आशुतोष ने लखनऊ से बीटेक करने के बाद मुंबई से एमबीए किया था। फिर टीसीएस में मैनेजर पद पर पांच साल जॉब की। जयजीत ने बताया कि उसके पिता बिजनेसमैन हैं। मगर जब वह शादी के बाद ससुराल पहुंची तो आईएएस अधिकारी और पीसीएस अधिकारी का महत्व समझ आया। आशुतोष के पिता एसएस मिश्रा रिटायर्ड एडनिशनल कमिश्नर हैं। इनके तीन बेटी और एक बेटा है। बड़ी बेटी एक स्कूल में प्रिंसिपल है। दूसरी बेटी डिप्टी कलेक्टर है और तीसरी बेटी असिस्टेंट कमिश्नर है। ननद को देखकर ही जयजीत ने तैयारी शुरू की और वर्तमान में एसडीएम लखनऊ हैं। पिछली बार आशुतोष का चयन असिस्टेंट कमिश्नर कोआपरेटिव पद पर हुआ था। अभी ज्वाइनिंग नहीं मिली थी। तभी पीसीएस 2017 का परिणाम आ गया। इस बार वे डिप्टी एसपी बन गए हैं। 

जिंदगी में भरी फिर रोशनी, बने दिव्यांग कल्याण अधिकारी
बर्रा आठ के अवधेश कुमार कौशल का चयन जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है। मूलता फर्रुखाबाद के गुरसहायगंज के रहने वाले अवधेश कुमार शिक्षक हैं। उनको 2016 में इनोवेशन को बढ़ावा देने पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका हैं। पत्नी नीरजा और तीन बेटियों के साथ हंसी खुशी रह रहे अवधेश की जिंदगी में वर्ष 2015 से ग्रहण लगना शुरू हो गया। रेटिनाइटिस पिगमेंटोस बीमारी की वजह से उनकी आंखों की रोशनी लगभग चली गई। जीवन में अंधेरा छा गया। अवधेश बताते हैं कि बचपन से ही सिविल सेवा में जाने की इच्छा थी। मगर शिक्षक की जॉब मिलने पर दोबारा सोचा नहीं। जब जीवन में अंधकार हुआ तो मेरी पत्नी नीरजा ने इस इच्छा को फिर जाग्रत किया और जीवन जीने का नया मकसद दिया। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड, दिल्ली में जाकर ट्रेनिंग ली और वापस आकर अपने सपने को पूरा करने में जुट गया। एपेक्स एकेडमी में दाखिला लिया और परीक्षा दी। अवधेश ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी नीरजा और कोचिंग के निदेशक देवी शंकर तिवारी को दिया। कोचिंग में जो भी पढ़ाई होती मेरी पत्नी उसे लिखती और घर जाकर लैपटॉप की मदद से पढ़ता। आज जाकर मेरा सपना पूरा हो गया।

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