पैसों के लालच में शातिर अपराधियों की भी ले रहे थे जमानत
Kanpur News - कानपुर देहात में पेशेवर जमानतगीरों बट्टन लाल और मनोज कुमार को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग आरोपियों की जमानत के लिए एक ही संपत्ति का बार-बार इस्तेमाल कर पैसे लेते थे। मनोज ने सड़क हादसों में भी जमानत कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अन्य मामलों की संभावना जताई है।

कानपुर देहात। न कोई रिश्ता और न कोई पहचान, मुल्जिम कितना भी शातिर हो इससे कोई मतलब नहीं सिर्फ पैसा दो और जमानत कराओ। इस तरह पेशेवर तरीके से जमानत लेने वाले दो आरोपितों को रूरा पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया है। अब पुलिस उनके पूरे काकस तक पहुंचने के लिये जांच शुरु की है। सिकंदरा कस्बे में 10 अक्टूबर को हुई बैंक के भीतर से तीन लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के अंशू सांसी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कोर्ट से इसकी जमानत स्वीकृत होने के बाद इनके जमानतगीरों के सत्यापन का आदेश हुआ।
इसमें रूरा थाना क्षेत्र के इकघरा गांव निवासी बट्टन लाल और भिखनापुर निवासी मनोज कुमार की जमानत का सत्यापन शुरु हुआ तो पता चला के ये लोग पेशेवर जमानतगीर हैं। खुद पैसे लेकर एक ही संपत्ति को बार-बार कोर्ट में लगाकर आरोपितों की जमानत लेते हैं। इसके बाद इन दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। एएसपी राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि दोनो पेशेवर जमानतगीर हैं। पैसे लेकर यह किसी की भी जमानत ले रहे हैं। बट्टन लाल अब तक 22 लोगों की जमानत ले चुका है। जबकि मनोज ने 17 लोगों की जमानत ली है। दोनो एक ही संपत्ति को छल पूर्वक कोर्ट में पेश करके आरोपितों की जमानत लेते हैं। इस मामले में दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। सीओ संजय सिंह ने बताया कि अब तक इनके इतने मामले सामने आ चुके हैं। अभी जांच जारी है और भी अधिक मामले आने की संभावना है। दोनों के करीब 10 साल से जमानत लेने के काम में लिप्त होने की बात सामने आई है। -7 मामलों में खुद चालक बन कर मनोज ने कराई जमानत सड़क हादसे में किसी की मौत होने पर भारी वाहन का लाइसेंस शुदा मनोज खुद को चालक के रुप में पेश करके सदोष लाभ अर्जित करता है। अब तक सात ऐसे में मामलों में जिसमें घायल की मौत हो गई हो और वाहन चालक के पास डीएल आदि न रहा हो तब मनोज उससे मोटी रकम लेकर अपना डीएल लगाकर जमानत करा लेता है। अब यह इनका पेशा है। -जमानत के खेल में शामिल हैं कई अधिवक्ता शातिर अपराधियों की जमानत लेने के मामले में कई अधिवक्ता भी शामिल है। इन दोनों आरोपितों ने बताया कि वकील ही उनसे संपर्क करते हैं। कभी अगर कोई मामला उलझता है तो वकील ही उसे निपटा लेते हैं। अब पुलिस इस तरह के वकीलों को भी चिह्नित करेगी। कई बार अधिवक्ता जमानतगीर न मिलने पर पार्टी को सीधे इनसे मिलवा कर सौदा कराते हैं। -मनोज ले रहा था गैर प्रांत के लोगों की भी जमानत भले ही बट्टन ने ज्यादा जमानतें लीं हों,लेकिन मनोज ने गंभीर अपराधों केे साथ दूसरे प्रांतों के लोगों की जमानतें ली हैं। मनोज ने धोखाधड़ी के मामले में कल्याणपुर कानपुर की एक महिला समृद्धि सिन्हा की जमानत ली,जबकि लूट के मामले में चकेरी कानपुर के सिकंदर उर्फ शादिल की जमानत ली। साइबरक्राइम के अपराधी भोपाल के रोहित सोनी और मधुबनी बिहार के रमेश कुमार चौधरी की जमानत ली है। तमिलनाडु के ट्रक चालक अरयुतराज एस की भी मनोज ने जमानत ली है। -जितने की जमीन नहीं उससे ज्यादा कीमत की ले चुके जमानत पेशेवर जमानतगीरों ने अपनी जमीन की कीमत से ज्यादा धनराशि की जमानत ले चुके हैं। बट्टन के पास कुल आठ बिस्वा जमीन है। इसकी कीमत करीब 5 लाख रुपये है, जबकि बट्टन के जो 22 मामले सामने आये हैं, उसमें उसकी जमानत राशि करीब साढ़े 13 लाख हो रही है। इसी तरह मनोज के पास 1 बीघा 11 बिस्वा जमीन है। इसकी कीमत करीब 13 लाख रुपये है। जबकि वह करीब 14 लाख तक कीमत की जमानतें ले चुका है। अपनी जरुरतें पूरी करने के लिये यह पेशेवर तरीके से जमानत ले रहे थे। -सत्यापन में भी लिखा गया पेशेवर जमानतगीर जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जमानत की सत्यापन के दौरान कई बार सत्यापन करने वाले दरोगा ने उसकी सुकुनत की तो तस्दीक कर दी,लेकिन उसके पेशेवर जमानतगीर होने का भी उल्लेख किया। इसके बाद भी इन पर कार्रवाई नहीं हो सकी।

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