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तालाब भराने के आंकड़े झूठे और दावे किताबी

तालाब भराने के आंकड़े झूठे और दावे किताबी

साहबों की फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, पर हकीकत में ये आंकड़े झूठे और दावे किताबी हैं, किसी शायर की ये पंक्तियां जनपद में पानी की समस्या पर सटीक बैठती हैं। शासन स्तर से गर्मी की शुरूआत में ही तालाब भराए जाने के तमाम निर्देशों के बावजूद सभी दस विकासखंडों के 1464 में अभी तक धूल उड़ रही है। अभी तक सिर्फ 1035 तालाबों में ही विभिन्न साधनों से पानी भराया जा सका है। तालाब सूखे होने से मवेशियों, पशु-पक्षियों में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची है और जिम्मेदार बेखबर हैं।

जेठ के महीने में आसमान से बरस रही आग लोगों को झुलसा रही है। कस्बों से लेकर गांवों में हैंडपंप, टयूवबेल, नलकूप भू-जल स्तर गिरने से ठूंठ बनकर रह गए हैं। अधिकारियों की माने तो जनपद के करीब 70 प्रतिशत तालाब नहरों के पानी पर आश्रित हैं, लेकिन इस बार नहरें, रजबहा, बंबा सभी सूखे पड़े हैं। इस कारण तालाब नहीं भर पा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद के सभी दस विकासखंडों में 2499 तालाब स्थित हैं, जिनमे से अभी तक मात्र 1035 तालाब भरे तथा 1464 तालाबों में धूल उड़ रही है। जबकि जमीनी हकीकत इसके और भी उलट है। तालाबों में पानी न होने के कारण सबसे ज्यादा समस्या बेजुबान पशु-पक्षियों व मवेशियों के लिए बनी हुई है। पिछले दिनों पानी न मिलने के कारण कई मोरों की भी मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी तालाब भराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

सिंचाई साधन से भराए गए सिर्फ 365 तालाब

जनपद के अंतर्गत नहर, नलकूप आदि साधनों से अभी तक सिर्फ 365 तालाब ही भराए जा सके हैं। सिंचाई खंड के एक्सईएन ओपी मौर्या ने बताया कि सभी ब्लाकों में स्थित कुल तालाबों में से 735 तालाब ही सिंचाई साधन के दायरे में आते हैं। इसके चलते 24 मई तक नलकूप से 25, सिंचाई खंड से 127, कानपुर प्रखंड निचली गंगा नहर से 105, भोगनीपुर प्रखंड निचली गंगा नहर से इटावा से 25, सिंचाई खंड औरैया से 44 तथा लघु डाल नहर खंड कानपुर से 29 तालाब ही भराए जा सके हैं।

29 तालाबों में मनरेगा से नहीं शुरू हुआ काम

अंर्तराष्ट्रीय श्रम दिवस के मौके पर एक मई को मनरेगा योजना से ग्राम पंचायतों में चिंहित किए गए 125 तालाबों में जीर्णोंद्धार कार्य का शुभारंभ किया गया था। अफसरों ने शुरूआत में जोर-शोर से कार्य शुरू कराते हुए प्रतिदिन हुए कार्य की प्रगति के बारे में फोटो मंगाकर मानीटरिंग की, लेकिन दिन बीतने के साथ ही जीर्णोंद्धार कार्य की रफ्तर सुस्त होती गई। इसके चलते 125 तालाबों में से 29 में अभी तक जीर्णोंद्धार कार्य शुरू नहीं हो सका है। जबकि 15 जून के आसपास मानसून दस्तक देने लगता है। ऐसे में तालाबों का जीर्णोंद्धार कब पूरा होकर उनमे पानी भराया जाएगा। इसपर अफसर मौन हो जाते हैं।

आखिर तालाब भराने के लिए कौन जिम्मेदार

जनपद में करीब 59 फीसद तालाब जेठ के महीने में खाली पड़े हैं। जिन्हें भराने का ठीकरा अफसर एक-दूसरे पर फोड़ रहे हैं। पूर्व में शासन ने 14वें वित्त से ग्राम पंचायतों को तालाब भराने का अधिकार दिया था, लेकिन इस बार राज्य वित्त से तालाब भराए जाने की मनाही होने के कारण उनमें धूल उड़ रही है। वहीं मनरेगा से तालाबों का सिर्फ जीर्णोंद्धार कराया जा रहा है। जबकि सिंचाई खंड, कानपुर प्रखंड निचली गंगा नहर, भोगनीपुर प्रखंड, सिंचाई खंड औरैया, लघु डाल नहर व नलकूप खंड सिर्फ अपने दायरे के तालाबों को भराने की कवायद करता है।

बोले जिम्मेदार-

सूखे पड़े तालाब व पोखर भराने के बावत एक्सईएन सिंचाई खंड ने बताया है कि नरौरा हेड से पानी कम उपलब्ध होने के कारण नहरें नहीं चल पा रही हैं। पश्चिमी इलाहाबाद शाखा से भी कम पानी मिल रहा है। इसपर मुख्य अभियंता (रामगंगा) सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग कानपुर को अपने स्तर से संबंधित अधिकारियों से बात कर निर्देश करने का पत्र भेजा गया है। जल्द ही तालाब व पोखर भराए जाएंगे।

-राकेश कुमार सिंह (डीएम)

-मनरेगा योजना से तालाबों का जीर्णोंद्धार कराया जा रहा है। सभी तालाबों में कार्य क्यों नहीं शुरू हो सका, इसकी जानकारी की जाएगी। लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

-अभिराम त्रिवेदी (प्रभारी उपायुक्त मनरेगा)

14वें वित्त से ग्राम पंचायतों को तालाब भराए पर रोक लगा दी गई है। पंचायती राज विभाग व ग्राम पंचायत स्तर पर तालाब भराने के लिए किसी प्रकार का बजट नहीं है।

-अजय कुमार श्रीवास्तव (डीपीआरओ)

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  • Web Title:Pond figures are false and claims book