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हैलट-कैंसर संस्थान में पैथोलॉजी जांचों को लकवा

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 06:25 PM
हैलट-कैंसर संस्थान में पैथोलॉजी जांचों को लकवा

हैलट और जेके कैंसर संस्थान में पैथोलॉजी जांचों को लकवा मार गया है। हैलट में कहने को 24 घंटे पैथोलॉजी है, मगर दोपहर तीन बजे के बाद ब्लड सैम्पल लेने वाले नहीं मिलते हैं। लोग इमरजेंसी से सैम्पल निकलवाकर लाते हैं। थायराइड और प्री ऑपरेटिव जांचें महीने भर से ठप हैं। कैंसर संस्थान में सिर्फ चार-पांच जांचें हो रही हैं। मरीजों को बाजार से जांचें कराने की सलाह दी जा रही है।

कैंसर संस्थान में लगभग एक साल से न तो बायोप्सी की जांच हो रही और न एफएनएसी की। खून की प्रोफाइल जांचें भी सालभर से नहीं हो रहीं। कुछ जांचों के लिए उपलब्ध मशीन सप्ताह में दो दिन खराब रहती है। दरअसल कैंसर संस्थान में हर फॉलोअप में मरीज को खून की कुछ जांचें करानी होती हैं। कैंसर संस्थान के मरीजों की जांच हैलट में भी नहीं हो पाती है। निदेशक प्रो. एसएन प्रसाद के मुताबिक, पैथोलॉजिस्ट नहीं है तो जांचें भी नहीं की जा सकती हैं। मशीनों से जो जांच संभव है उसे टेक्नीशियन कर देते हैं। हालांकि 4-5 जांचें होती हैं। हैलट के प्रमुख अधीक्षक प्रो. आरके मौर्या के मुताबिक, पैथोलॉजी लैब में नियमित मॉनीटरिंग की जरूरत है। ब्लड सैम्पल के लिए मरीजों को दुश्वारी उठानी पड़ रही है।

हैलट में दो अल्ट्रासाउंड मशीन, 250 मरीज

हैलट में दो अल्ट्रासाउंड मशीन हैं। 250 मरीज रोज अल्ट्रासाउंड को आ रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों की भी वेटिंग है। वैसे ओपीडी में आ रहे मरीजों को 20 से 25 दिन की वेटिंग मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि मशीनें भी पुरानी हैं। एक मशीन लगभग चार साल पुरानी है तो दूसरी छह साल। इन मशीनों से ओवरलोड जांचें हो रही हैं। इसलिए यह जल्दी कमजोर हो रही हैं। रिपोर्टिंग की गुणवत्ता भी खराब होती है।

जेके कैंसर में सभी रेडियोलॉजी जांचें ठप

जेके कैंसर संस्थान का हाल भी गजब है। यहां अल्ट्रासाउंड के साथ सीटी और एमआरआई की भी सुविधा नहीं है। मशीनें सभी मौजूद हैं, मगर जांच करने वाले नहीं। संस्थान की ओर से कागजी प्रयास किए जा रहे हैं। मरीज महंगी जांचें कराने को मजबूर हैं।

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