
शासन के रुख से असमंजस में पंचायत चुनाव के दावेदार
Kanpur News - त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के दावेदारों की सक्रियता शासन के सुस्त रुख से कम हो रही है। पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होने से चुनाव समय पर होने की संभावना कम हो गई है। दावेदार अब चुनाव टलने की आशंका से समाज सेवा में भी कम सक्रिय हो रहे हैं।
त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के लिये दावेदारों की सक्रियता शासन के सुस्त रुख से मंद पड़ने लगी है। दावेदार अब चुनाव टलने की आशंका से अपने पांव धीरे-धीरे पीछे खींच रहे हैं। शासन की ओर से अब तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न किये जाने से अब चुनाव समय पर होने की उम्मीद नहीं है। चार महीने पहले से ही पंचायत चुनाव को लेकर मतदाता सूची पुनरीक्षण शुरु होने के साथ ही दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई थी। ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत तक दावेदार समाज सेवा में जुट गये थे। इसके लिये उन्होंने पैसा भी खर्च करना शुुरु कर दिया था।
वहीं चुनाव के पहले आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने के लिये शासन को पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर जिले वार उनकी स्थिति का आकलन कराने के बाद भी चुनाव हो सकता है। इस काम में कम से कम दो महीने का समय लगना तय माना जा रहा है। इस हालत में फरवरी का महीना शुरु होने के बाद भी अब तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होने से चुनाव समय से न होने के आसार पैदा हो गये है। दावेदार अब खुद चुनाव टलने की संभावना बता कर लोगों के बीच अपनी गति धीमी करने के साथ ही समाजसेवा के भाव को भी कम कर रहे हैं। वहीं इस बात के भी कयास लग रहे हैं 2027 में विधानसभा चुनाव होने के चलते सरकार पंचायत चुनावों को टाल कर आगे बढ़ाने के मूड में है। इसके चलते पंचायत चुनाव की तैयारियों की गति भी पूरी तरह ठहरी हुई लग रही है।

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