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कानपुरकानपुर ही नहीं, इन राज्यों के बीमाधारकों को भी शिकार बना चुके ठग

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरPublished By: Newswrap
Sat, 12 Jun 2021 04:33 AM
कानपुर ही नहीं, इन राज्यों के बीमाधारकों को भी शिकार बना चुके ठग

कानपुर। वरिष्ठ संवाददाता

बीमाधारकों के साथ करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह की जड़ें देश के कई राज्यों में फैली हैं। आशंका है कि इसी गिरोह ने वहां भी बीमाधारकों को अपना शिकार बनाया है। पुलिस को अब तक तेलंगाना, महाराष्ट्र और उत्तराखण्ड में दर्ज एफआईआर के बारे में जानकारी मिली है। क्राइम ब्रांच ने वहां के पुलिस अधिकारियों को इस गिरोह के बारे में जानकारी दे दी है। इसके अलावा डाटा बेचने वालों, बैंक खाते आरोपितों को उपलब्ध कराने वालों और प्रीएक्टीवेटेड सिम अपराध देने के आरोपितों का भी क्राइम ब्रांच ने पता लगा लिया है। इनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

हैदराबाद के मियापुर और साइबराबाद थाने में दो, देहरादून में दो और रत्नागिरी, महाराष्ट्र में दो एफआईआर के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है। वहां पर अपराध का कानपुर में पकड़े गए गिरोह जैसा ही है। हालांकि, सभी एफआईआर अज्ञात में दर्ज की गई हैं। एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने बताया कि सभी जगह के अधिकारियों को इस गिरोह के बारे में जानकारी दे दी गई है। जिन खातों में पैसे भेजे गए, उनकी संख्या भी उपलब्ध करा दी गई है। उन शहरों के अफसरों के पास जो खाता नम्बर है, उनसे यहां का डाटा मैच कर रहा है। अब हैदराबाद, रत्नागिरी और देहरादून की पुलिस इन आरोपितों के खिलाफ बी वॉरंट बनवाकर शहर आकर पूछताछ करेगी। सारे तथ्य मिलने पर आरोपितों की उन शहरों में पेशी कराई जाएगी।

आधा दर्जन शहरों के बैंक खातों का इस्तेमाल : एडीसीपी के मुताबिक जिन खातों के बारे में जानकारी मिली है, वे अयोध्या, फैजाबाद, हरदोई, इटावा, फर्रुखाबाद आदि शहरों के हैं। दूसरे प्रदेशों की पुलिस के पास जो खाता संख्या है, वह भी इन्हीं शहरों के खातों से मैच कर रही है।

मैक्स के दिए 12 खातों का विवरण मैच : मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी के एचआर ने 12 खातों का विवरण पुलिस को दिया है। एडीसीपी के मुताबिक जो 33 खाते पुलिस ने खोजे थे, कम्पनी के 12 खाते उनसे मैच कर गए हैं। यह भी एक ठोस सबूत है।

कानपुर के 2800 लोगों का डाटा था : आरोपितों के पास से पुलिस ने कानपुर के 2800 बीमाधारकों का डाटा बरामद किया है। उसे बेचने वाले इंश्योरेंस एजेंट की पहचान भी पुलिस ने कर ली है। उसकी तलाश में क्राइम ब्रांच की दो टीमों को लगाया है।

लखनऊ से खरीदे थे प्रीएक्टिवेटेड सिम : आरोपितों ने लखनऊ से प्रीएक्टिवेटेड सिम खरीदे थे। वहां पर किराए का फ्लैट लेकर काम कर रहे थे। एडीसीपी ने बताया कि एक्टिवेटेड सिम बेचने वाला भी लखनऊ का है। उसकी भी पहचान हो चुकी है।

ऑनलाइन मार्केटिंग की आड़ में धोखाधड़ी : गिरोह के सरगना शिवम का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2020 में वह पंजाब की डायनमिक बेनिफिशियल एकार्ड मार्केटिंग लिमिटेड कम्पनी के लिए काम करता था। कम्पनी के अधिकारियों के खिलाफ एडीसीपी दीपक भूकर ने मुरादाबाद में एफआईआर दर्ज करा आरोपितों को जेल भेजा था। यह कम्पनी भी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रही थी।

क्या है पूरा मामला : कानपुर के बर्रा पांच निवासी अमित गुप्ता ने 24 मई को बर्रा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का प्रीमियम जमा कराने के नाम पर उनसे 51 हजार रुपये की ठगी की गई है। एडीसीपी दीपक भूकर के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान गिरोह के सरगना घटिया अकमल गली, इटावा निवासी शिवम कुशवाहा, पवरानपुरवा गांव रायबरेली निवासी वरुण सिंह, करण सिंह, हमदर्द नगर, नई दिल्ली निवासी आशीष कनौजिया, नंदराम पार्क उत्तम नगर डीडीए नई दिल्ली निवासी करण शर्मा और संजय एनक्लेव उत्तम नगर नई दिल्ली निवासी अमन को गिरफ्तार किया। ये आरोपित बीमाधारकों का डाटा अवैध ढंग से इकट्ठा करते थे। फिर फोन कर प्रीमियम पर छूट का झांसा देकर अपने खाते में जमा करा लेते थे। अब तक केवल कानपुर में दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है।

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