
महिला डॉक्टर ने पति से आठ लाख गुजारा भत्ता लिया, आयोग सदस्य भी हैरत में
Kanpur News - कानपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, बलात्कार और तलाक के 24 मामले सामने आए। डॉ. स्वाति को तलाक के लिए पति ने 9 लाख रुपये दिए। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। साथ ही, प्री मैरिटल काउंसलिंग सेंटर की स्थापना की गई है।
केस वन पनकी निवासी स्वाति पेशे से डॉक्टर हैं। उनकी शादी इंदिरा नगर निवासी युवक से 28 फरवरी 2023 को हुई थी। पति पीएचडी कर रहे थे। दोनों के बीच अनबन इस कदर हुई की बात तलाक तक पहुंच गई। फिलहाल, डॉ. स्वाति को तलाक मिल गया, इसके लिए पति ने स्वाति को नौ लाख रुपये दिए। गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार ने जब प्रकरण बंद होने से पहले तलाक का किस्सा सुना तो भी हैरत में पड़ गईं। कहने लगीं कि डॉक्टर होकर भी नौ लाख गुजारा भत्ता लिया। केस टू मैडम, पुलिस से हमें न्याय नहीं मिल रहा है।

हमारी लीज की जमीन पर भाई का दोस्त नजर लगाए है। किदवईनगर में 1998 में घर बना था। जबकि, वर्ष 1997 का कागज लगाकर उसने दावा कर दिया। आरोपी मुझ पर और मेरी बेटी पर बुरी नजर रखता है। हमारी जान को खतरा है। मंजू अरोड़ा की फरियाद सुन राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने डीएसपी अर्चना से घटनाक्रम जाना। महिला को सुरक्षा का भरोसा दिया। साथ ही, कहा कि सिविल केस कोर्ट सुनेगा। कानपुर, प्रमुख संवाददाता। राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, बलात्कार, तलाक आदि के कुल 24 मामले सामने आए। इनमें दो मामलों में मियां-बीवी राजी होकर हंसी-खुशी घर गए, तो वहीं अन्य मामलों में आवश्यकतानुसार समाधान के निर्देश महिला आयोग की सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार ने दिए। जनसुनवाई में कुल 60 लंबित प्रकरण लगे थे। इनमें 24 वादी-प्रतिवादी मौके पर पहुंचे। इनके अलावा 10 नए मामले भी जनसुनवाई में लगाए गए। इन सभी मामलों को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने गंभीरता से सुना। त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का निस्तारण समयबद्ध रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि पीड़ित महिलाएं शीघ्र राहत प्राप्त कर सकें। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि आजकल तलाक के प्रकरण ज्यादा आ रहे हैं। इसके लिए तेरे मेरे सपने नाम से प्री मेरेटियल काउंसलिंग सेंटर चलाया जा रहा है, जहां शादी तय होने से पहले जोड़ों को एक-दूसरे को समझने के अवसर मुहैया कराए जाते हैं। यदि किसी को लगता है कि अमुक व्यक्ति हमारा जीवनसाथी बनने के योग्य नहीं है, तो समय रहते कदम पीछे खींच लेगा। इससे तलाक के मामलों में कमी आ सकेगी। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा के हैं। रेप के मामलों में ज्यादातर ऐसे मामले हैं, जिनमें रजामंदी से रिश्ता रहा। बाद में महिला को धोखा मिला। धोखा देकर शारीरिक शोषण करने वाले मामले भी गंभीर हैं।

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