खाड़ी देशों से व्यापार ठप, यूरोप-अफ्रीकी बाजारों पर टिका यूपी का निर्यात

Mar 09, 2026 08:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, कानपुर
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Kanpur News - मध्य पूर्व में चल रहे जंग ने उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। ईरान-अमेरिका टकराव के कारण व्यापारिक आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे दुबई, कतर और यूएई जैसे प्रमुख केंद्रों से निर्यात ठप हो गया है। निर्यातक अब यूरोप और अफ्रीकी देशों में नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं।

खाड़ी देशों से व्यापार ठप, यूरोप-अफ्रीकी बाजारों पर टिका यूपी का निर्यात

कानपुर, प्रमुख संवाददाता। मध्य पूर्व में जंग ने उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार की रीढ़ तोड़ दी है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव ने खाड़ी क्षेत्र की समुद्री और हवाई व्यापारिक आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रदेश के उद्योगों पर पड़ रहा है। दुबई, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से होने वाला निर्यात लगभग ठप हो गया है। हालात ऐसे हैं कि निर्यातकों को अब यूरोप और अफ्रीकी देशों के बाजारों में ही उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। कानपुर, नोएडा, आगरा और मुरादाबाद जैसे औद्योगिक शहरों से चमड़ा, सैडलरी, रेडीमेड गारमेंट, इंजीनियरिंग और हस्तशिल्प का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के रास्ते दुनिया भर में भेजा जाता रहा है।

मौजूदा संकट के कारण इन मार्गों पर माल की आवाजाही बाधित हो गई है। गारमेंट टेक्स्टाइल एसोसिएशन के यूपी चेयरमैन बलराम नरूला के मुताबिक, दुबई, कतर और यूएई के साथ होने वाला व्यापार लगभग ठहर सा गया है, जिससे सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। इजराइल के साथ-साथ जॉर्डन और लेबनान जैसे देशों को भेजे जाने वाले माल की आपूर्ति भी बाधित हो चुकी है। कई शिपिंग कंपनियों ने जोखिम का हवाला देते हुए समुद्री मार्गों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है, जिससे माल ढुलाई की लागत बढ़ गई है और पुराने अनुबंध भी निरस्त हो रहे हैं।अमेरिका से कारोबार में पहले ही गिरावट :चमड़ा निर्यात परिषद के रीजनल चेयरमैन असद इराकी कहते हैं कि मौजूदा स्थिति काफी कठिन है। अमेरिका के साथ व्यापार पर पहले से ही दबाव बना हुआ है। 150 दिन के लिए मान्य 15 प्रतिशत टैरिफ ने प्रदेश के निर्यात को झटका दिया है। इसके कारण कई अमेरिकी ऑर्डर घटे हैं और निर्यातकों को नए बाजार तलाशने पड़ रहे हैं।लंबी अवधि वाले सौदों से निर्यातक कन्नी काट रहे हैं। ऐसे में अमेरिका से कारोबार न के बराबर है। प्लास्टिक निर्यातक मनोज शुक्ला मानते हैं कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उद्योगों में उत्पादन घटने के साथ रोजगार पर भी दबाव बढ़ेगा।यूरोप, अफ्रीकन, आसियान देशों पर निर्भरता :भारतीय निर्यात परिषद के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव कहते हैं कि खाड़ी देशों के अलावा इजराइल व उसके आसपास के देशों से कारोबारी गतिविधियां ठप हैं। अमेरिका से 15 फीसदी कारोबार की मान्यता सिर्फ 150 दिन ही है। ऐसे में निर्यातक जरा सा भी जोखिम लेने की स्थिति में नहीं हैं। अब यूरोप, अफ्रीकन, आसियान देशों पर ही पूरा निर्यात टिका है। प्रदेश के कुल निर्यात का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा यूरोप और अफ्रीकी देशों के बाजारों पर है। इन क्षेत्रों में मांग बनी रहने से कुछ हद तक राहत की उम्मीद जताई जा रही है। वैश्विक तनाव और शिपिंग संकट की वजह से लगभग 35 प्रतिशत कारोबार पहले ही प्रभावित हो चुका है। सहायक निदेशक का मानना है कि संघर्ष लंबे समय तक खिंचने से छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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