
गुरु नानक देव का प्रकाशोत्सव आज, लाखों छकेंगे लंगर
संक्षेप: Kanpur News - मोतीझील मैदान में रात भर तैयार हुआ लंगर, धूल फ्री तैयार किया गया है लंगर
मोतीझील मैदान में रात भर तैयार किया गया लंगर धूल फ्री तैयार किया गया है लंगर का पंडाल कानपुर, वरिष्ठ संवाददाता। वाहे गुरु वाहे गुरु के सिमरन के साथ मंगलवार को दिन-रात लंगर की तैयारी सेवा चलती रही। मोतीझील में चल रहे तीन दिवसीय समारोह के दूसरे दिन सुबह और शाम का दीवान सजा, जिसमें रागी जत्थों ने संगत को निहाल किया। बुधवार को श्री गुरु नानक देव जी का 557 वां प्रकाशोत्सव मनाया जाएगा। यहां लाखों की संगत एक ही पंगत में गुरु का अटूट लंगर छकेगी। बोले सो निहाल, सत श्री अकाल और वाहे गुरु जी का खालसा वाहे गुरु जी की फतेह के उद्घोष के बीच सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत लंगर में अपना योगदान देने के लिए मोतीझील पहुंचने लगे थे।

विशाल मंच पर भव्य पालकी में विराजमान जुगो जुग अटल साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष संगत माथा टेककर अपनी श्रद्धा अर्पित कर गुरुवाणी कीर्तन से निहाल हुई। लंगर तैयारी सेवा में सतगुरु की सेवा सफल है, जे को करे चित्त लाए को चरितार्थ कर रहे थे। ऐसे तैयार हुआ लंगर, मशीन से भी बने प्रशादेः लंगर तैयारी की सेवा मोहन सिंह झास, ज्ञानी मदन सिंह, जसवंत सिंह भाटिया, गुरदीप सिंह गांधी, टीटू सागरी की देखरेख में प्रातःकाल से ही आरंभ हुई। जहां दाल, सब्जी के भंडारण से लेकर उनकी साफ सफाई, दाल, सब्जी, रोटी आदि पकाने की प्रक्रिया दिन भर चलती रही। लंगर इंचार्ज टीटू सागरी ने बताया कि करीब 85 कुंतल आटा के प्रशादे (रोटी) बनाए गए हैं। इसमें से 15 कुंतल आटा से रोटी मशीन से बनाई गई है। एक घंटे में 4500 रोटियां तैयार होती हैं। इसमें 15 कुंतल आटा लगा। 20 से अधिक सेंटरों पर भी प्रशादे तैयार किए गए। 7500 गोभी, 25 टिन घी, 35 कुंतल दाल आदि से लंगर तैयार किया गया। धूल फ्री तैयार किया गया लंगर पंडालः श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष सरदार हरविंदर सिंह लार्ड ने संगत से लंगर छकने के बाद झूठे पत्तल अन्यत्र न फेक कर निश्चित स्थानों पर रखे गए डस्टबिन में डालने की अपील की है। पुरुषों व महिलाओं के लिए अलग अलग लंगर पंडाल तैयार किए गए हैं। पूरे लंगर पंडाल में मैटिंग की गई है ताकि धूल उड़ने से श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, लंगर पंडाल धूल फ्री तैयार किए गए हैं। यहां सुखविंदर सिंह भल्ला लाडी, हरमिंदर सिंह लोंगोवाल, मीतू सागरी, करमजीत सिंह, दया सिंह गांधी, महेंद्र सिंह भाटिया, राजू खंडूजा आदि ने तैयारी की। रागी जत्थों ने संगत को निहाल कियाः सुबह के दीवान की शुरुआत भाई भूपिंदर सिंह गुरदासपुरी ने जित्थे बाबा पैर धरे, पूजा आसन थापन सोआ, धन धन गुरु नानक समदर्शी का गायन किया। भाई सुरिंदर सिंह भाई मोहन सिंह शास्त्री नगर वालों ने भाई जसकरन सिंह जी पटियाला वाले हजूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर ने मेरे साहिबा मेरे साहिबा कौन जाते गुण तेरे व इक बाबा अकाल मूरत, दूजा रबाबी मर्दाना का कीर्तन कर संगत को निहाल किया। पंडाल बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारों से गूंज उठा। गुरमत विचार करते हुए डा. मनप्रीत सिंह दिल्ली वाले ने कहा कि गुरु नानक देव जी की आमद से पहले प्रजा माया (धन दौलत) की गफलत में अंधी हुई घूम रही थी, मानवता का ह्रास हो रहा था। तब गुरु नानक ने मानवता को इस अंधकार से बाहर निकालने का काम किया। भाई सतनाम सिंह कोहड़का ने भी संगत को निहाल किया।

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