मणिपुर वाले भी आपके अपने हैं.. उन्हें विदेशी मत समझिए
Kanpur News - मणिपुर के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इरेंगबम हेमोचंद्र सिंह ने कानपुर में कहा कि मणिपुर भारत का हिस्सा है और पूर्वोत्तर के विकास के लिए अन्य प्रांतों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान जरूरी है। उन्होंने मणिपुर में सामाजिक जुड़ाव और विकास की गति तेज करने के लिए कदम बढ़ाने का आह्वान किया।

मणिपुर भी आपका यानी भारत के अन्य प्रांतों की तरह देश का ही हिस्सा है। खासकर हिन्दी पट्टी के लोगों का आना-जाना बढ़े तो दोनों का फायदा हो। समग्रता में भारत की संस्कृति की समझी जाए और पूर्वोत्तर के विकास की गति तेज हो। कानपुर आए मणिपुर के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व पूर्व मंत्री इरेंगबम हेमोचंद्र सिंह ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में यह कहा। उन्होंने कहा कि शेष भारत में पूर्वोत्तर के लोगों को अजनबी की तरह भिन्न संस्कृति के व्यक्ति की तरह देखने की प्रवृत्ति है। यह तभी दूर होगी जब मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक, ऐतिहासिक समझ पूरे देश के लोगों में विकसित हो।
नार्थ ईस्ट का विकास हो। वहां के लोगों को देश भर में सम्मान मिले। इसके लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। दिल्ली से बजट मिलता है लेकिन, मणिपुर में विकास सिर्फ कागजों पर हो रहा है। सामाजिक जुड़ाव के लिए उन्होंने पांच बिंदुओं पर कानपुर समेत शेष भारत का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आना-जाना बढ़े। आप एक कदम बढ़ाएं, हम 100 कदम बढ़ाएंगे। अपने घर की तरह मणिपुर आएं। ज्ञान और संस्कृति का आदान-प्रदान हो। व्यापार का व्यवहार के साथ रसोई का रिश्ता बढ़ाया जाए। कानपुर के लोग आंध्र, केरल और पंजाब के व्यंजन तो जानते हैं, पूर्वोत्तर का शायद एक भी व्यंजन यहां नहीं खाया जाता।अच्छा सीएम कर सकता था कंट्रोलउन्होंने कहा कि मणिपुर अभी भी सुलग रहा है। वहां कुकी और मैतेई के बीच संघर्ष हुआ था। जिसे शायद अच्छा सीएम या मजबूत ब्यूरोक्रेट कंट्रोल कर सकता था। 1993 में भी कुकी और नागा के बीच विवाद हुआ था, तब जल्द नियंत्रण हो गया था। उन्होंने माना कि लापरवाही के कारण हालात अधिक बेकाबू हुए। वर्तमान में भी विवाद शांत नहीं हुआ है। जैविक खेती और सोलर कटर देखने पहुंचे थे यहांआई. हेमोचंद्र सिंह कानपुर में जैविक खेती और सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि यंत्रों के प्रयोग देखने के लिए कानपुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने पहला सोलर ब्रश कटर और धान थ्रेशर बनाने वाले प्रगतिशील किसान विवेक चतुर्वेदी से मिलकर विकल्प फार्म पर उनकी खेती देखी। नवाचार के तहत बने सौर संयंत्रों को चला कर भी देखा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, धन और श्रम बचाने वाले इन यंत्रों का इस्तेमाल पूर्वोत्तर में भी हो, इसके लिए वह प्रयास करेंगे। विवेक चतुर्वेदी ने उन्हें कृषि क्षेत्र में किए गए नवाचारों की जानकारी दी।
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