DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लोकमान्य तिलक हादसाः एलएचबी कोच ने बचाई 1,060 यात्रियों की जान

लोकमान्य तिलक हादसा

उन्नाव में रविवार को हुए ट्रेन हादसे ने पुखरायां में हुई घटना की यादें ताजा कर दीं। लोकमान्य तिलक टर्मिनल के 11 डिब्बे पटरी से उतर गए तो लोगों के दिल दहल गए। सात डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए पर कोई हताहत नहीं हुआ। यह सब हुआ रेलवे की नई तकनीक की बदौलत। असल में एलटीटी एक्सप्रेस के सभी कोच एलएचबी (लिंके हॉफमैन बुश) थे, ऐसे में कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त भले ही हो गए पर अंदर बैठे लोग सही-सलामत रहे। कोई भी डिब्बा न तो कपलर से अलग हुआ और न ही एक-दूसरे पर चढ़ा।
मुबई से लखनऊ जा रही एलटीटी उन्नाव रेलवे स्टेशन पर जिस सेक्शन में बेपटरी हुई, वह प्वाइंट कॉशन वाला था, इस कारण ट्रेन की अधिकतम स्पीड 60 किमी प्रति घंटा रहती है। ऐसे में जब ट्रेन के कोच पलटे तो पटरी से उतरने के बाद कई मीटर तक घिसटते चले गए पर कपलर से अलग नहीं हुए। न तो कोई डिब्बा लुढ़का और न ही एक-दूसरे पर चढ़ा। रेल हादसे की सूचना पर जीएम एनआर और मंडल रेल प्रबंधक मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू करा दिया। रेलवे अफसरों ने बताया कि सोमवार दोपहर तक ट्रैक फिट हो सकता है। तब तक डाउन मार्ग की ट्रेनों को उन्नाव स्टेशन की लूप लाइन से गुजारा जाएगा। अप लाइन पूरी तरह से चालू है। 
कोच की क्या खासियत
एलएचबी कोचों की खास बात यह है कि ये एच टाइप सीबीसी (सेंटर बफर कपलर) से कनेक्ट होते हैं। इस कारण बेपटरी होने के बाद एक-दूसरे पर चढ़ते नहीं हैं। 20 नवंबर को पुखरायां के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस में जनरल कपलर लगे थे जो टूटने के बाद एक-दूसरे पर चढ़ गए थे। यही वजह है कि इस दर्दनाक हादसे में 152 से अधिक की मौत हो गई।
रूरा और पुखरायां हादसे की होती पुनरावृत्ति तो
ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद मौके पर पहुंची इंजीनियरिंग टीम खुद हैरत में पड़ गई। टीम के सदस्यों का कहना था कि हादसा तो बड़ा है पर ट्रेन में बफर कपलर न लगे होते तो पुखरायां हादसे की पुनरावृत्ति हो जाती और कई लोग हादसे का शिकार होते। इसकी वजह यह थी कि प्लेटफार्म पर कोच चढ़ते तो घटना के समय लगभग तीन सौ लोगों की भीड़ थी क्योंकि इसके बाद मेमू को आना था। इसके अलावा जो कोच पटरी से उतरे, वे हाउसफुल थे क्योंकि सभी कूपे एसी थ्री के हैं।
दो साल में हर ट्रेन में एलएचबी कोच
एनसीआर के पीआरओ अमित मालवीय ने बताया कि एनसीआर सहित देशभर में चलने वाली सभी ट्रेनों में दो साल के भीतर एलएचबी कोच लग जाएंगे। इन कोचों की स्पीड सामान्य डिब्बों से 30 किमी प्रति घंटा अधिक है। साथ ही ये डिब्बे पूरी तरह सुरक्षित भी हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने विशेष योजना के तहत एलएचबी कोचों का निर्माण तेजी से शुरू करा दिया है। एनसीआर में प्रयागराज, स्वर्ण शताब्दी, दूरंतो एक्सप्रेस में यह कोच लगा भी दिए गए हैं।
एक साल के भीतर इन ट्रेनों में भी एलएचबी कोच
12451-12452 श्रमशक्ति एक्सप्रेस
12469-12470 बर्फानी एक्सप्रेस
12473-12474 उद्योग नगरी एक्सप्रेस
12944-12943 उद्योग कर्मी एक्सप्रेस
14163-14164 संगम एक्सप्रेस
12403-12404 इलाहाबाद जयपुर एक्सप्रेस  
छह महीने के भीतर चौथा बड़ा रेल हादसा
20 नवंबर-2016 को पुखरायां में रेल हादसा
28 दिसंबर-2016 को रूरा स्टेशन के पास रेल हादसा
12 जनवरी-2017  छमकनाली (लखनऊ रूट पर) पर मालगाड़ी बेपटरी
21 मई-2017 (लखनऊ रूट पर) एलटीटी के सात डिब्बे बेपटरी

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:LHB coach saved 1,060 lives