प्रश्नपत्र बनाने में एआई के प्रयोग पर गाइडलाइन जारी
प्रश्नपत्र बनाने में एआई के प्रयोग पर गाइडलाइन जारी प्रश्नपत्र बनाने में एआई के प्रयोग पर गाइडलाइन जारी प्रश्नपत्र बनाने में एआई के प्रयोग पर गाइडलाइन जारी

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में एआई की मदद से प्रश्नपत्र बनाने और संबंधित शिक्षिका के इस्तीफा देने के विवाद के बाद विवि प्रशासन ने प्रश्नपत्र निर्माण में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के उपयोग पर स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर दी है। विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के निर्देश पर गुरुवार को जारी इन गाइडलाइंस का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग के साथ परीक्षा की गोपनीयता, निष्पक्षता, शैक्षणिक गुणवत्ता को बनाए रखना है। विवि में कुछ दिन पहले एक मामला सामने आया था, जिसमें एआई से प्रश्नपत्र तैयार करने के दौरान सही कमांड न देने की वजह से प्रश्नों में काफी दोहराव था।
विवि प्रशासन ने साफ किया है कि एआई का उपयोग केवल सहायक उपकरण के रूप में किया जा सकता है। प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी समीक्षा और अंतिम स्वीकृति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक और परीक्षक की ही रहेगी। तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए, लेकिन मानवीय जवाबदेही से समझौता नहीं किया जा सकता। गाइडलाइन में परीक्षा की गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी अप्रकाशित प्रश्नपत्र, मूल्यांकन रिकॉर्ड या छात्रों से जुड़ा डेटा सार्वजनिक या असुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड न करें। केवल संस्थान द्वारा स्वीकृत सुरक्षित सिस्टम का ही उपयोग करने की अनुमति होगी। गाइडलाइन के अनुसार, प्रश्न तैयार करते समय निर्धारित पाठ्यक्रम, टेक्स्टबुक, कक्षा नोट्स और पुराने प्रश्नपत्रों का उपयोग अनिवार्य होगा। प्रश्न यूनिट-वाइज बनाए जाएंगे और पूरे सिलेबस को संतुलित रूप से कवर करना जरूरी होगा। बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्प तार्किक और संतुलित होने चाहिए तथा केवल एक सही उत्तर होना जरूरी है। तकनीकी और विज्ञान विषयों में एआई से बने सूत्र, गणना, ग्राफ की मैन्युअल जांच अनिवार्य होगी। प्रश्नों में किसी प्रकार का सांस्कृतिक, भाषाई, लैंगिक अथवा क्षेत्रीय पक्षपात नहीं होना चाहिए।
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