
तीन घरों में गूंजी किलकारी, लावारिसों को मिली ममता की छांव
संक्षेप: Kanpur News - - तीन मासूमों को सड़क पर लावारिस छोड़ गए थे, कारा के जरिए मिले
कानपुर, प्रमुख संवाददाता। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार को जैसे ही तीन लावारिस बच्चों को गोद देने का प्रमाणपत्र तीन निसंतान दंपतियों को सौंपा। कलेक्ट्रेट सभागार का माहौल भावनाओं से भर गया। खुशी से तीनों दंपति की आंखें नम हो गईं। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद इन दंपतियों को मातृत्व और पितृत्व का सुख मिला। अब इन घरों में बच्चों की किलकारियां गूंजेंगी। अभिभावकों को सौंपते ही बच्चों का नया नामकरण कर दिया गया। मासूमों को लावारिस छोड़ भागे नौ महीने पहले नवजात परी नजीराबाद थाना क्षेत्र में लावारिस हालत में मिली। नवजात करन कोतवाली क्षेत्र में निराश्रित अवस्था में मिला और नवजात सोना अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर अकेले मिली थी।

इन तीनों मासूमों को बाल कल्याण समिति के आदेश से स्वरूप नगर स्थित राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई/ बालिका गृह में रखा गया। वहां इनकी देखरेख हुई और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर इन्हें स्वतंत्र घोषित किया गया। यह बने माता-पिता हैदराबाद के प्रवीण कुमार दीवानजी और लता श्रीवास्तव ने परी को गोद लिया, जिसका नया नाम रायिनी रखा गया। प्रवीण की शादी 2017 में हुई थी। तब से वह बच्चों की किलकारी सुनने को बेकरार थे। धनवाद (झारखंड) के दिनेश कुमार तिवारी और अनामिका तिवारी ने करन को गोद लिया, जिसका नाम आयांस तिवारी रखा गया है। इनकी शादी 2014 में हुई थी। तब से यह लोग बच्चे के लिए परेशान थे। जयपुर के भीमराज और मीना देवी ने सोना को गोद लिया, जिसे अब वान्या नाम मिला है। माथा चूमा, सीने से लगाया बोले- घर पूरा हो गया जब लता श्रीवास्तव ने नन्हीं रायिनी को सीने से लगाया, उनकी आंखें छलक पड़ीं। मीना देवी ने वान्या का माथा चूमा, तो दिनेश तिवारी ने आयांस को गोद में भरकर कहा कि आज हमारा घर पूरा हो गया। तीनों परिवारों ने 2021 में बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन किया था। अब जाकर उनको बच्चा मिल सका। वह बच्चा पाने के लिए हर दिन वेबसाइट को चेक कर रहे थे। सभी औपचारिकताओं के बाद अगस्त 2025 में फी-फॉस्टर केयर एडॉप्शन कमेटी के निर्णय पर निर्धारित शुल्क जमा कर बच्चों को अस्थायी रूप से सौंपा गया। अंतिम आदेश के लिए 27 अक्तूबर को जिलाधिकारी कार्यालय में साक्षात्कार हुआ और आदेश जारी कर दिया गया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी नगर डॉ. राजेश कुमार तथा जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास कुमार भी मौजूद रहे। इस तरह से गोद ले सकते बच्चे दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया केवल केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के पोर्टल https://cara.wcd.gov.in से ही मान्य है। किसी अन्य माध्यम से गोद लेना विधिक रूप से अवैध माना जाएगा। आवेदक दंपत्ति को कारा की वेबसाइड पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होता है। पैन कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र अथवा आयकर विवरणी, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और नवीनतम फोटो समेत सभी आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने होते हैं। इसके उपरांत जिला बाल संरक्षण इकाई आवेदक का सामाजिक और आर्थिक मूल्यांकन करते हुए गृह अध्ययन रिपोर्ट तैयार करती है और उसे पोर्टल पर अपलोड करती है। जब सारी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो पहले बच्चों को फॉस्टर केयर में सौंपा जाता है, जिसके दौरान दंपत्ति को निर्धारित शुल्क जमा करना पड़ता है। अंतिम चरण में जिलाधिकारी कार्यालय में सुनवाई और साक्षात्कार होता है। सभी नियम पूरे होने पर जिलाधिकारी विधिक रूप से दत्तक ग्रहण का आदेश जारी करते हैं।

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