
देश को मिले कानपुर के 13 यूनिकॉर्न बदल रहे किस्मत
Kanpur News - कानपुर के 13 स्टार्टअप अब यूनिकॉर्न बन चुके हैं और देश की किस्मत बदलने में योगदान दे रहे हैं। आईआईटी कानपुर से शुरू हुए ये नवाचार सॉफ्टवेयर के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव ला रहे हैं। एसआईआईसी में विकसित ये स्टार्टअप रोजगार बढ़ाने और आत्मनिर्भरता में मदद कर रहे हैं।
कानपुर। अभिषेक सिंह। स्टार्टअप से यूनिकॉर्न बन चुके कानपुर के 13 नवाचार अब देश की किस्मत बदल रहे हैं। आईआईटी कानपुर से छोटे से स्टार्टअप के रूप में शुरुआत करने वाली यह 13 कंपनियां वर्तमान में अपने नवाचार के माध्यम से पूरी दुनिया में नाम कमा रही हैं। इसमें अधिकतर स्टार्टअप सॉफ्टवेयर की मदद से बदलाव ला रहे हैं। आईआईटी कानपुर में बने एसआईआईसी (स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर) में अत्याधुनिक तकनीक की मदद से अनुसंधान व नवाचार कर स्टार्टअप नए-नए उत्पाद व तकनीक विकसित कर रहे हैं। एसआईआईसी में विकसित 50 से अधिक स्टार्टअप बड़े स्तर पर रोजगार देने के साथ समाज में बदलाव ला रहे हैं।
संस्थान के 13 स्टार्टअप अब तक यूनिकॉर्न का सफर तय कर चुके हैं। सर्वाधिक चार यूनिकॉर्न 2014 में बने। एसआईआईसी के प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप ने कहा कि यूनिकॉर्न की ओर अभी कई स्टार्टअप अग्रसर हैं, जो भविष्य में यह मुकाम हासिल कर लेंगे। वर्तमान में डिफेंस, एग्रीकल्चर, क्लीन, मेडिकल, इनवायरमेंट, सस्टेनेबिलिटी समेत सभी क्षेत्र में स्टार्टअप नवाचार कर रहे हैं। ये स्टार्टअप देश को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित होंगे। आईआईटी अब तक 500 से अधिक स्टार्टअप को इंक्यूबेट कर चुका है। यूनिकॉर्न क्या होता है यूनिकॉर्न कंपनी का मतलब एक निजी स्वामित्व वाली स्टार्टअप कंपनी से है, जिसका मूल्य एक बिलियन डॉलर से अधिक है। यह स्टॉक मार्केट में सूचीबद्ध नहीं होनी चाहिए, यानी यह अभी भी निजी निवेशकों के स्वामित्व में होती है। ये स्टार्टअप बने यूनिकॉर्न -इनमोबि, परफियोस, डेल्हीवेरी, लेडस्क्वायर्ड, रिविगो, नोब्रोकर, अर्बन कंपनी, लिवस्पेस, मॉगलिक्स, शेयरचैट, कल्टडॉटफिट, एमपीएल, ग्लांस।

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