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कानपुर को ‘रबर स्टाम्प’ मेयर नहीं चाहिए  

‘आओ राजनीति करे’ महाअभियान के तहत व्यापारियों के साथ संवाद।

मेयर शहर का प्रथम नागरिक होता है, लेकिन उसकी ताकत ‘दंत-नख विहीन शेर’ की तरह है। चुनाव के समय हाथ जोड़कर जनता के बीच घूमने वाले प्रत्याशी जीतते ही जनता से दूरी बना लेते हैं। जीतने के बाद खुद को ‘अधिकारविहीन’ बताकर पल्ला झाड़ने वाले प्रतिनिधि नहीं चाहिए बल्कि अपने अधिकारों को पहचान कर शहर का विकास करने वाले जनप्रतिनिधि की जरूरत है। रही बात मेयर पद के लिए महिला सीट की, तो महिलाएं ही घर संवारती हैं और जब नारीशक्ति के हाथ में शहर की सरकार आएगी तो निश्चित रूप से शहर भी संवरेगा बशर्ते उसमें जनता का दर्द और परेशानियों को समझने का जज्बा हो। ये बातें ‘हिन्दुस्तान’ द्वारा आयोजित ‘आओ राजनीति करे’ महाअभियान के तहत शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों के संवाद में उभर कर आईं। 
हिन्दुस्तान कार्यालय में सोमवार को विभिन्न बाजारों और व्यापार संगठनों के व्यापारी एक मंच पर जुटे। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में देश और प्रदेश की नीतियों का निर्माण होता है। इसी तरह से नगर की सरकार यानी स्थानीय निकाय का उनसे सीधा संबंध हैं। जनता सबसे ज्यादा खस्ताहाल सड़क, ओवरफ्लो सीवर, कम पानी, बदहाल मार्ग प्रकाश, आवारा जानवर, अतिक्रमण, पार्किंग संकट और ई रिक्शा की अराजकता से दुखी हैं। अगर नगर निगम अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाए तो तीन चौथाई समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। 
व्यापारियों का कहना था कि अभी तक तो यही देखते आए हैं कि अधिकारी हो या कर्मचारी, कोई मेयर की नहीं सुनता। नगर आयुक्त के पास ज्यादा अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि अभी हमें यही नहीं पता कि मेयर और पार्षद के पास कितने अधिकार हैं। इसका फायदा उठाया जाता है। यूरिनल, ग्रीन बेल्ट पर व्यापारी खर्च करने को तैयार हैं लेकिन स्वीपर और माली की व्यवस्था कराना नगर निगम का काम है। 
नगर निगम अफसरों पर सवाल उठाते हुए व्यापारियों ने कहा कि यही कर्मचारी और अधिकारी जब लखनऊ जाते हैं तो वहां काम करने लगते हैं। कानपुर आते ही कमाने के रास्ते ढूंढने लगते हैं। फिर कहा कि जब मेयर के पास अधिकार ही नहीं हैं तो चुनाव में पैसा और समय क्यों बर्बाद किया जाता है। ऐसे में जरूरत क्या है ऐसे मेयर की। इस पद को खत्म क्यों नहीं कर दियाजाता है। 
संविधान में संशोधन कर मिलें अधिकार
व्यापारियों ने कहा कि संविधान में संशोधन कर मेयर को अधिकार दिए जाएं। अभी मेयर किसी दूसरे दल का हो और राज्य में सरकार किसी दूसरे दल की, तो काम नहीं होते। ऐसे में शहरवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। व्यापारियों का कहना था कि शहर में व्यापार संगठन बहुत सक्रिय हैं और यही व्यापारियों की ताकत हैं। इस ताकत को एक मंच पर लाकर व्यापारी अपने अधिकार ले सकते हैं। इसलिए जरूरत है एक ऐसे मेयर की जो व्यापारियों की भी भावनाओं का ख्याल रखे। 
पार्षद-मेयर को वेतन मिले 
व्यापारियों को कहना था कि विधायक-सांसद की तरह पार्षद-मेयर को भी वेतन-भत्ते मिलने चाहिए। अभी जो भी जीतकर आता है, कमाने में लग जाता है। अगर पैसे मिलेंगे तो भ्रष्टाचार पर कुछ लगाम कसी जा सकेगी। कमीशनखोरी पर कुछ तो अंकुश लग ही जाएगा। अभी हाल ये है कि कागजों पर 50 सफाईकर्मी हैं लेकिन हकीकत में दस ही काम करते हैं।
वार्डवार चौपाल लगाएं
व्यापारियों ने कहा कि इच्छाशक्ति हो तो मेयर हर काम कर सकता है। जिस तरह चुनाव से पहले वार्डों का चक्कर लगाते हैं, जीतने के बाद भी हर वार्ड में जाकर चौपाल लगाएं और अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करें तो काफी समस्याएं हल हो जाएंगी। व्यापारियों ने साफ कहा कि मेयर को समस्याएं हम क्यों बताएं। वह भी तो इसी शहर का नागरिक है। क्या उसे शहर की दिक्कतें नहीं पता? 
हाउस टैक्स के नाम पर लूट
व्यापारियों का सबसे बड़ा दर्द बना कॉमर्शियल टैक्स व हाउस टैक्स उभर कर सामने आया। उनका कहना था कि नगर निगम प्रोविजनल रसीद काटकर टैक्स वसूल रहा है। इसका मतलब है कि निगम जब चाहे, जितना चाहे टैक्स बढ़ा सकता है। 20 साल में 30 गुना टैक्स पहले ही बढ़ाया जा चुका है। इसके बाद भी निगम बजट का रोना रोता है। नवीन मार्केट की 400 दुकानों की रजिस्ट्री का मुद्दा बरसों से फंसा है। इसे हल करने से करोड़ों मिल जाएंगे।  

ऐसा होना चाहिए मेयर 

  • मेयर निरीह प्राणी की तरह व्यवहार न करे बल्कि अपने अधिकार जानता हो
  • नगर निगम अपने पार्कों के नीचे अंडरग्राउंड पार्किंग बनवाए, ऊपर हरियाली हो
  • शहर में जाम की समस्या से निपटने के लिए फ्लाईओवर बनवाने की पहल करे
  • नगर निगम का अन्य विभागों के साथ समन्वय शून्य है, इसे दूर किया जाए
  • सड़क बनते ही खोदने की परम्परा केवल कानपुर में है, इसे मेयर ही खत्म कर सकते हैं
  • कमाई के लिए मेयर नए रास्ते तलाशें न कि कुछ पैसों के लालच में फुटपाथ पार्किंग के नाम पर बेचें 
  • जनता के बीच पहुंच वाला और उनकी समस्याओं के लिए हर वक्त उपलब्ध रहने वाला मेयर हो
  • नगर निगम के अस्पतालों को प्राथमिकता पर ठीक कराएं और उनका अन्य कार्यों में सदुपयोग करें
  • मेयर के पास न्यू कानपुर का विजन हो, ताकि दबाव कम करने को इसका विस्तार संभव हो 

प्रमुख समस्याएं

  • पार्किंग की समस्या शहर के लिए गंभीर है, केवल दो पार्किंग से काम नहीं चलेगा। 
  • पूरे शहर को कूड़ाघर बना दिया है। मुख्य मार्गों में कूड़ाघर बने हैं जो सड़कों तक फैले हैं। 
  • आवारा जानवरों ने चलना दूभर कर दिया है। आए दिन हादसे हो रहे हैं। इनका आतंक खत्म हो
  • शहर भर में नगर निगम ने सब्जी मंडियां    लगवा रखी हैं। भ्रष्टाचार के इस रास्ते पर रोक लगाई जाए। 
  • ई रिक्शा नई आफत बन गए हैं। मुख्य मार्गों के अलावा गलियों को भी चौपट कर डाला। 
  • नवीन मार्केट को ऑडिटोरियम बना दिया।    बैठने के लिए 37 प्लेटफॉर्म बना दिए, जिसमें 1300 लोग बैठ सकते हैं। 
  • चौराहों के सुंदरीकरण से ज्यादा अस्पताल, पार्क को संवारने पर मेहनत की जाए। 
  • बजबजाते सीवर शहर के लिए कोढ़ हैं। सफाई के नाम पर खानापूरी पर रोक लगाई जाए। 

 

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  • Web Title: Kanpur does not want rubber stamp Mayor