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दिल्ली मेट्रो, ताजमहल व संसद भवन की सुरक्षा करेगी कानपुर की कार्बाइन

स्माल आर्म्स फैक्ट्री (एसएएफ) द्वारा तैयार ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन (जेवीपीसी) शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सीआईएसएफ को सौंप दी गई। दुनिया की सबसे खतरनाक कार्बाइन में शुमार जेवीपीसी का इस्तेमाल ताजमहल की सुरक्षा में किया जाएगा। संसद भवन, दिल्ली मेट्रो और वीवीआईपी सुरक्षा में भी जेवीपीसी को लिया जाएगा।


शनिवार को स्माल आर्म्स फैक्ट्री कैंपस में आयोजित समारोह में शस्त्र पूजन के साथ सीआईएसएफ के कमांडेंट ब्रजभूषण को एसएएफ के महाप्रबंधक संजय कुमार पटनायक ने सौ कार्बाइन और 25 हजार गोलियों की पहली खेप सौंपी। उनके साथ डिप्टी कमांडेंट अरविन्द कुमार सिंह, संयुक्त महाप्रबंधक आरके मीना, अपर महाप्रबंधक अजय सिंह, तुषार त्रिपाठी सहित यूनियनों के पदाधिकारी भी मौजूद थे। 


एक मिनट में 900 राउंड गोलियां उगलेगी जेवीपीएस
कानपुर स्थित एसएएफ ने बहुप्रतीक्षित मारक हथियार ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन यानी जेवीपीसी को तैयार किया है। जेवीपीसी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह एक मिनट में 900 राउंड फायर करती है। महज तीन किलो वजनी जेवीपीसी का निशाना सटीक है। यह 23 परतों वाली बुलेट प्रूफ जैकेट को भी भेदने में सक्षम है। फायरिंग करते समय ये बिलकुल नहीं हिलती और स्थिर रहती है। इस आधुनिक कारबाइन में नाइट विजन कैमरा भी लगा सकेंगे। 

सशस्त्र बलों और पुलिस की नई ताकत बनेगी
ये कार्बाइन हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस की नई ताकत बनकर उभरी है। मौका चाहे इंडियन आर्मी के बख्तरबंद गाड़ियों में सफर या गश्त करते समय हुए आतंकी हमले का हो या किसी कमांडो कार्रवाई में पैराशूट से हवाई छलांग लगाने का, इन मौकों पर अगर हथियार हिल गया तो समझो निशाना चूका और दुश्मन को बच निकलने का मौका मिल गया लेकिन स्माल आर्म्स फैक्ट्री ने इन दिक्कतों को लगभग खत्म कर दिया है। 


दुनिया की टॉप फाइव कार्बाइन में शुमार
जर्मनी ने 'एचके' और बेल्जियम ने 'एफएन' नाम से ऐसी की कार्बाइनें बनाई हुई हैं और उनकी मांग कई देशों से आती रहती हैं, लेकिन अब भारत के पास पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से बनी जेवीपीसी कार्बाइन है। एसएएफ के महाप्रबंधक ने बताया कि जेवीपीसी कार्बाइन दुनिया की टॉप फाइव कार्बाइन में शामिल हो गई है। लंबे शोध और परीक्षण के बाद इसे तैयार किया गया है। इसकी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेवीपीसी विश्व विख्यात हथियार एमपी-5, एमपी-7 और पी-2000 से भी कई मायनों में बेहतर है। इस संबंध में सीआईएसएफ कमांडेंट ब्रज भूषण ने बताया कि जेवीपीसी की मारक क्षमता बेजोड़ है। लक्ष्य को भेदने में इसकी एक्यूरेसी 100 फीसदी है। इसकी विशिष्ट गोली केवल टारगेट को हिट करती है। आसपास वालों को घायल नहीं करती। 


संवेदनशील औद्योगिक उपक्रमों में भारी मांग
जेवीपीसी की लोकप्रियता इतनी जबर्दस्त है कि परीक्षण में सफल होने के बाद से अबतक 10 हजार आर्डर फैक्ट्री को मिल चुके हैं। इनमें छत्तीसगढ़ पुलिस, मणिपुर पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर के बांध आदि अन्य योजनाओं की सुरक्षा में जेवीपीसी का इस्तेमाल होगा। नक्सली और आतंक प्रभावित इलाकों के लिए जेवीपीसी बिल्कुल मुफीद है। इसे देखते हुए एसएएफ ने फिलहाल सालाना दस हजार जेवीपीसी की उत्पादन क्षमता के लिए खुद को तैयार कर लिया है।

 

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  • Web Title:Kanpur carbine will protect Delhi Metro Taj Mahal and Parliament House