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कानपुर के गेहूं से मिलेगा देशभर को पोषण

कानपुर के गेहूं से देशभर के लोगों को पोषण मिलेगा। इसके सेवन से शरीर में जिंक व आयरन की कमी नहीं होगी। गेहूं की इस विशेष प्रजाति के-1317 और के-1006...

कानपुर के गेहूं से मिलेगा देशभर को पोषण
हिन्दुस्तान टीम,कानपुरWed, 24 Apr 2024 03:10 PM
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कानपुर के गेहूं से देशभर के लोगों को पोषण मिलेगा। इसके सेवन से शरीर में जिंक व आयरन की कमी नहीं होगी। गेहूं की इस विशेष प्रजाति के-1317 और के-1006 को चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इस प्रजाति को देशभर में प्रचारित करने के लिए विवि ने गेहूं अनुसंधान संस्थान, हरियाणा के साथ समझौता किया है। देशभर में गेहूं पर रिसर्च और उसे बढ़ावा देने वाला यह संस्थान इकलौता है। यह संस्थान अब देशभर में कानपुर के गेहूं का प्रचार-प्रसार करेगा।

सीएसए विवि के वैज्ञानिक गेहूं की नई-नई प्रजाति विकसित कर रहे हैं, जो पोषकतत्व से भरपूर होने के साथ अधिक पैदावार व रोगमुक्त प्रजाति हैं। विवि में विकसित के-1317 और के-1006 गेहूं की प्रजाति को लेकर विवि और गेहूं अनुसंधान संस्थान के बीच समझौता हुआ। इसके बाद संस्थान इन दोनों प्रजातियों को देशभर के किसानों के बीच ले जाने के साथ विभिन्न इलाकों में ट्रायल भी कराएगा। सीएसए विवि के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह के मुताबिक गेहूं अनुसंधान संस्थान के साथ समझौता हुआ है। इसके तहत के-1317 और के-1006 गेहूं की प्रजाति को प्रचारित किया जाएगा। इस प्रजाति को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा अन्य किसानों तक पहुंचाने की तैयारी है। साथ ही, इसका क्षेत्र देशभर में प्रसारित किया जाएगा।

के-1006- विवि की विकसित यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर में 55 से 60 कुंतल पैदावार देती है। इसमें जिंक की मात्रा 49.2 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) है और आयरन की मात्रा 45.2 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) है। यह प्रजाति रोग प्रतिरोधी है। इसमें प्रोटीन का स्तर 12.2 पीपीएम है। यह अभी तक उप्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम में प्रभावी है।

के-1317 - विवि की विकसित इस प्रजाति में प्रति हेक्टेयर में 55 से 60 कुंतल पैदावार होता है। इस प्रजाति में सिर्फ दो बार पानी की आवश्यकता पड़ती है। यह रोग प्रतिरोधी है। यह प्रजाति बुंदेलखंड समेत कम बारिश वाले इलाकों में अधिक प्रभावी है।

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