Kanpur News: पंद्रहवें वित्त आयोग के 540 करोड़ के टेंडर भी जांच में फंसे
Kanpur News: नगर निगमइस मद से मनमाने ढंग से तैयार किए गए प्रस्ताव, लुटाए गए पैसेखास पार्षदों के वार्डों में ही टेंडर क्यों जारी हुए, शुरू की गई जांचकानपुर, मुख्य संवाददाता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के...

Kanpur News: नगर निगम इस मद से मनमाने ढंग से तैयार किए गए प्रस्ताव, लुटाए गए पैसेखास पार्षदों के वार्डों में ही टेंडर क्यों जारी हुए, शुरू की गई जांच
कानपुर, मुख्य संवाददाता।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से जारी किए गए 540 करोड़ के टेंडर भी जांच में फंस गए हैं। इन टेंडरों के लिए तैयार हुए प्रस्तावों के साथ ही स्वीकृति और बाद में हुए निर्माण कार्यों की जांच भी नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने शुरू करा दी है।
भ्रष्टाचार का खुलासा
हकीकत यह है कि नगर निगम में चौदहवें और पंद्रहवें वित्त आयोग के लिए प्रस्तावों को तैयार करने और उसे फाइनल करने की प्रक्रिया वर्ष 2024 से पहले कुछ और थी। बाद में इस मद के टेंडरों पर वर्चस्व कायम कराने के लिए इसकी प्रक्रिया ही बदल दी गई। नतीजा यह हुआ कि इसमें मनमानी चलने लगी। जिस वार्ड के पार्षद पर कृपा बरसानी हो तो इस मद का इस्तेमाल कर दिया गया। जिस पार्षद या वार्ड को दरकिनार करना हो उसके लिए भी यह मद प्रभावी हो गया। इसकी सबसे खास वजह यह थी कि सिर्फ एक रसूखदार के हाथों में इसकी कमान आ गई। इससे पहले मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, केडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त मिलकर तय करते थे कि शहर में जनहित के बड़े काम कौन-कौन से होने हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों से इस मद पर खास सियासी रसूखदार का कब्जा हो गया।
वुड रिपोर्ट
एक वार्ड में 6.5 करोड़, दूसरे में शून्य
ये आंकड़े हैरान करने वाले हैं। अगर सिर्फ नगर निगम के जोन चार में हुए विकास कार्यों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में वार्ड नंबर 15 में पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से सबसे ज्यादा 6.97 करोड़ के कार्य हुए जबकि वार्ड नंबर चार, वार्ड नंबर 10, 49, 59, 61. 75 और 97 में प्रस्तावों के साथ ही कार्यों की संख्या भी शून्य रही। अगर हम थोड़ा और पीछे चलें तो वित्तीय वर्ष 2023-24 में पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से वार्ड नंबर 15 में सबसे ज्यादा 1.86 करोड़ के टेंडरों के विकास कार्य हुए जबकि 3. 4, 5, 10, 13, 42, 49, 59, 61, 75 और वार्ड नंबर 97 में कोई भी कार्य इस मद से नहीं हुए। थोड़ा और पीछे चलते हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भी वार्ड नंबर 15 में सबसे ज्यादा 119.46 लाख के काम पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से कराए गए जबकि वार्ड नंबर 10 और 14 में कोई काम इस मद से नहीं हुआ। इस वित्तीय वर्ष में बाकी वार्डों में हुए कार्यों का प्रतिशत वार्ड नंबर 15 के सापेक्ष 50 प्रतिशत भी नहीं है। ये आंकड़े गवाह हैं कि कुछ खास वार्डों पर ही पंद्रहवें वित्त आयोग से विकास कार्यों की कृपा बरसाई गई।
जांच की प्रक्रिया
भाजपा के बागी पार्षदों के दावों में बहुत दम
यह सच्चाई भी कड़वी है कि भाजपा के बागी पार्षदों के दावों में बहुत दम है। अगर वह कह रहे हैं कि पंद्रहवें वित्त आयोग के मद की रकम की शहर में खास वार्डों के खाते में बंदरबांट हुई तो इसमें कोई गुरेज नहीं। खुद नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के निर्देश पर ही इन पार्षदों को ये आंकड़े उपलब्ध कराए गए कि किन वार्डों में पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से कितने काम हुए। बागी पार्षद पवन गुप्ता, विकास जायसवाल, आलोक पांडेय और लक्ष्मी कोरी का दावा है कि अगर इन कार्यों की गुणवत्ता जांच ली जाए तो सारा सच सामने आ जाएगा। पवन गुप्ता कहते हैं कि भ्रष्टाचार इतना हुआ कि जनता त्रस्त हो गई।
कोट::::फोटो
फिलहाल वर्ष 2024-25 से अब तक हुए सारे टेंडरों और विकास कार्यों की जांच हो रही है। इसमें उन पार्षदों की शिकायतों को भी शामिल किया गया है जो यह दावा कर रहे हैं उनके वार्ड के साथ अन्याय हुआ और कार्यों की गुणवत्ता भी खराब है। जांच के बाद जो रिपोर्ट सामने आएगी उसके आधार पर कार्रवाई होगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त


