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कानपुर

मसवानपुर इलाके में तो 401 बीघा सरकारी जमीन ही गायब

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरPublished By: Newswrap
Fri, 09 Jul 2021 06:31 PM
मसवानपुर इलाके में तो 401 बीघा सरकारी जमीन ही गायब

आवास विकास परिषद को आंबेडकर पुरम योजना विकसित करने के लिए मुफ्त में मिली 401 बीघे की सरकारी जमीन ही गायब हो गई। लगभग 1500 करोड़ की इन जमीनों पर भूमाफिया ने कब्जा करके बेच दिया। आवास विकास देखता ही रह गया। आज उन जमीनों पर आलीशान कोठियां तन गई हैं।

हकीकत यह है कि सारा खेल आवास विकास परिषद के तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों और भूमाफिया के बीच मिलीभगत से हुआ। राजस्व ग्राम मोहसिनपुर (मसवानपुर) में खाता संख्या 338 में बंजर दर्ज आराजियों का कुल रकबा 35 बीघा 15 बिस्वा है। खाता संख्या 344 ऊसर में दर्ज आराजियों का कुल रकबा 365 बीघा 11 बिस्वा है। ऊसर और बंजर जमीनें ग्राम सभा की ही होती हैं। 1360-61 फसली वर्ष (वर्ष 1953-54) में इन खातों में ये जमीनें ऊसर और बंजर में दर्ज थीं। इसका प्रबंधन पहले नगर महापालिका के पास था। बाद में केडीए में निहित हो गया। आवास विकास ने जब इन जमीनों की मांग की तो शासन के निर्देश पर जमीनें मुफ्त में दे दी गईं। सच्चाई यह है कि इन जमीनों का रखरखाव आवास विकास परिषद के अफसर नहीं कर पाए। इन अराजियों की अधिकांश जमीन इलेक्ट्रिक सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन (थर्मल पावर स्टेशन पनकी) के नाम दर्ज कर दी गईं थीं। फसली वर्ष 1385 से 1390 में यह जमीनें इंद्राज हुईं थीं। बाद में फसली वर्ष 1390 में कुछ आराजी आवास विकास परिषद को हस्तांतरित की गईं और कुछ अराजी नगर महापालिका को कंपोस्ट प्लांट लगाने के लिए दी गईं। 10 जून 1982 को तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के आदेश पर हस्तांतरण की कार्यवाही हुई थी।

आवास विकास के अफसर जवाब देने से बच रहे

आवास विकास परिषद निर्माण खंड 17 के अधिशासी अभियंता से आरटीआई से इन जमीनों के गायब होने के संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता योगेश वर्मा ने जानकारी मांगी थी, मगर अफसरों ने गोलमोल जवाब दिया। जवाब मिला कि पुराना मामला होने से इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। खास बात यह है कि 2017 में इस मामले में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व शत्रुघ्न सिंह ने जांच कराई थी मगर उनका तबादला होते ही जांच की फाइल ही गायब कर दी गई। इस संबंध में जवाब के लिए अधीक्षण अभियंता अरविंद कुमार को कॉल की गई मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया। अधिशासी अभियंता अभेषेक राज का कहना था कि वह बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं।

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