नवाचार संग कचरे का भी निस्तारण करेगा आईआईटी
कानपुर। प्रमुख संवाददाता पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आईआईटी

कानपुर। प्रमुख संवाददाता पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आईआईटी कानपुर ने जीरो वेस्ट लैब मॉडल और व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की है। जिसके तहत संस्थान में हो रहे अनुसंधान व नवाचार के दौरान ही निकलने वाले अपशिष्ट (कचरे) का समाधान किया जाएगा। जिससे अनुसंधान के दौरान भी किसी तरह का प्रदूषण न फैले। साथ ही, आईआईटी को सबसे पहले कार्बन मुक्त कैम्पस बनाने पर भी काम किया जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब आईआईटी कानपुर ने अनुसंधान व नवाचार प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। इसके तहत कचरे का विकेंद्रीकृत उपचार किया जा रहा है।
इसके लिए कई विकेंद्रीकृत इकाईयां भी स्थापित की गई है। आवास, हॉस्टल, परिसर से निकलने वाले बायोडिग्रेडेबल कचरे से जैविक खाद तैयार कर इस्तेमाल किया जा रहा है। अनुसंधान के दौरान केमिकल हैंडलिंग प्रोटोकॉल, इकोफ्रेंडली डिजाइन, डिजिटल मॉनीटरिंग लागू की गई है। जिससे नवाचार के दौरान अन्य किसी तरह का प्रदूषण न फैले। साथ ही, अगर अनुसंधान के दौरान कोई अपशिष्ट निकलता है तो उसे रीसाइकिल कर दोबारा उपयोग में लाने का प्रयास किया जा रहा है। संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर ने अद्वय जैसी पहल की है। जिसमें स्टार्टअप्स के माध्यम से प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को तकनीक से समाधान किया जाएगा। इसमें कार्बन-न्यूट्रल दृष्टिकोण: इस जीरो वेस्ट पहल के अलावा, संस्थान जल संरक्षण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटरलेस यूरिनल के उपयोग पर काम होगा।
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