IIT Kanpur will make small farmers enriched by startup - आईआईटी कानपुर छोटे किसानों को स्टार्टअप से समृद्ध बनाएगा DA Image

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आईआईटी कानपुर छोटे किसानों को स्टार्टअप से समृद्ध बनाएगा

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अब छोटे किसानों को उनकी मेहनत का अधिक लाभ मिल सकेगा और इस पहल को शुरू कर रहा है आईआईटी कानपुर। ऐसे किसानों के लिए संस्थान जल्द ही स्टार्टअप ला रहा है जिसके जरिए इनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सके। स्टार्टअप के लिए टाटा ट्रस्ट और बिल गेट्स फाउंडेशन 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेंगे। आईआईटी के वैज्ञानिक इसमें मेंटर की भूमिका निभाएंगे। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के तीन सबसे पिछड़े जिलों श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर के किसानों को योजना में रखा गया है। इसके शुरू होने से किसानों के साथ जिले के लोगों को भी फायदा मिलेगा, यहां रोजगार के साधन बढ़ जाएंगे।


भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईआईटी) कानपुर में इंडिया एग्रीटेक इंक्यूबेशन नेटवर्क (आईएआईएन) बनाया जा रहा है। यहां विशेषज्ञ जाकर बेहतरीन आइडिया का प्रस्तुतिकरण दे सकते हैं। संस्थान के वैज्ञानिक इन आइडिया को स्टार्टअप में डेवलप करने के लिए न सिर्फ मेंटर का काम करेंगे, बल्कि फंडिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। विशेष ध्यान यह रहेगा कि इससे छोटे किसान किस तरह मजबूत हो सकते हैं। स्टार्टअप का प्रमुख उद्देश्य यह है कि अगले पांच वर्षों में देश के 50 हजार से अधिक छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की जा सकी। कृषि को आसान बनाने वाले 60 स्टार्टअप फिलहाल शुरू किए जाएंगे, जिसका अगले दो वर्षों में असर नजर आने लगेगा। आईएआईएन की शुरुआत आईआईटी कानपुर और प्रदेश के तीन शहरों से शुरू हो रही है, जिसे जल्द ही अन्य प्रदेशों तक भी पहुंचाया जाएगा।


आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि खेती को आसान और लाभकारी बनाने के साथ-साथ किसानों का विकास भी जरूरी है। जरूरत है कि कृषि को आकर्षक पेशे में बदला जाए। सस्ती तकनीक, अधिक उत्पादन, कम लागत के साथ जलवायु परिवर्तन व दैवीय आपदा से भी फसलों को बचाया जा सके। इसके लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग बीज की रोपाई से लेकर कटाई, सिंचाई से लेकर बाजार तक में करना पड़ेगा। इस नेटवर्क के जरिए ऐसे स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।


आईआईटी में होगा देश का पहला इंडिया एग्रीटेक इंक्यूबेशन नेटवर्क
आईआईटी कानपुर में देश का पहला इंडिया एग्रीटेक इंक्यूबेशन नेटवर्क होगा। जहां वैज्ञानिक और युवाओं की टीम मिलकर खेती को आसान और उन्नत बनाने पर शोध करेगी। नए-नए स्टार्टअप तैयार किए जाएंगे, जो कम या अधिक बारिश में भी किसानों को नुकसान से बचा सकें। किसानों को बड़ा बाजार दिलाने के लिए भी काम होगा। कम लागत में कैसे अधिक उत्पादन हो, इसका तरीका भी वैज्ञानिक तलाशेंगे। टाटा ट्रस्ट और बिल गेट्स फाउंडेशन का आईआईटी के साथ इसे लेकर समझौता हो चुका है।

आईआईटी के इन स्टार्टअप ने लाया बदलाव
हेल्पअस ग्रीन : अंकित अग्रवाल के इस स्टार्टअप को संयुक्त राष्ट्र भी सम्मान से नवाज चुका है। इस स्टार्टअप में मंदिरों में चढ़ने वाली फूल-माला को एकत्र कर उससे इकोफ्रेंड्ली अगरबत्ती बनाई जा रही है। अब मंदिरों पर चढ़ने वाले फूल न तो सड़कों पर फेंके जाते और न ही गंगा में। इससे गंगा में प्रदूषण भी कम हो रहा है।

री प्रोड्यूस कैथेटर : विक्रम गोयल के इस स्टार्टअप ने न जाने कितनी जिंदगियों को बचाया है। हार्ट, किडनी, न्यूरो जैसी बीमारी में कैथेटर का प्रयोग होता है। अधिक महंगा होने के कारण हर मरीज इसका उपयोग नहीं कर पाता। स्टार्टअप से एक कैथेटर का प्रयोग दस बार हो सकता है, जिससे कीमत काफी कम हो जाती है। स्वीडन सरकार  इस पर एमओयू करने जा रही है।

प्रोमार्फ : ओंकार प्रसाद के इस स्टार्टअप से परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। साथ ही एक कमरे में बैठकर बच्चों, शिक्षक व मिडड मील का आकलन किया जा सकता है। इस स्टार्टअप का प्रयोग झारखंड सरकार कर चुकी है। जल्द ही त्रिपुरा में इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की शुरुआत होने जा रही है।

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