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उत्पीड़न में जान देने पर पति, सास व ससुर को सजा

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरNewswrap
Thu, 08 Jul 2021 05:41 PM
उत्पीड़न में जान देने पर पति, सास व ससुर को सजा

कोरोना महामारी में बंद चल रही कोर्ट खुलते ही एडीजे 12 विनय कुमार सिंह द्वितीय ने पहली सजा सुनाई है। प्रताड़ना से तंग आकर जान देने के मामले में कोर्ट ने पति, सास व ससुर को सजा सुनाई। सभी के खिलाफ जुर्माना भी लगाया है।

गुरसहायगंज के नदसिया मतौली निवासी जय नारायण द्विवेदी ने बेटी शुभा की शादी मई 2009 में रूरा मुरलीपुर और वर्तमान में नौबस्ता खाड़ेपुर निवासी रजनीश तिवारी से की थी। शादी के बाद से ही दहेज को लेकर ससुराल वाले शुभा को परेशान करने लगे। उसके साथ आए दिन मारपीट करते थे। 24 नवंबर 2016 को रजनीश ने फोन करके शुभा के मरने की जानकारी उसके पिता को दी। जब घर आकर पिता ने देखा तो शुभा के शरीर पर कई चोटें थीं। कमरे में चूड़ियां भी टूटी पड़ी थीं। आसपास के लोगों ने बताया कि प्रताड़ना से तंग आकर पंखे के सहारे फांसी लगाकर शुभा ने जान दे दी। पिता जय नारायण द्विवेदी ने नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने पति रजनीश तिवारी, ससुर रवींद्र प्रकाश और सास सुशीला देवी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एडीजीसी शिव भगवान गोस्वामी ने बताया कि पांच साल तक चली सुनवाई में लड़की के पिता समेत आठ गवाहों ने गवाही दी है। कोर्ट ने पति को साढ़े पांच साल व चार हजार रुपए और सास व ससुर को साढ़े तीन साल की सजा व चार-चार हजार रुपए का अर्थदंड लगाया हैं।

दो पुत्रियां होने पर देते ताने

एडीजीसी ने बताया कि शुभा के दो बेटियां होने पर ससुराल वाले कुल का नाश होने का नाता देकर उसे प्रताड़ित करते थे। भिखारिन कहकर मकान बनवाने के लिए दो लाख रुपए घर से लाने की मांग करते थे। न लाने पर मारते थे। कई बार घर से भी निकाल दिया। समझाकर फिर बेटी को घर भेजा गया।

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