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ब्रह्मदत्त हत्याकांडः दोषी पूर्व विधायक विजय सिंह की सपा परिवार में है गहरी पैठ

फर्रुखाबाद से पूर्व सदर विधायक विजय सिंह।

बहुचर्चित ब्रह्मदत्त कांड के आरोपी विजय सिंह सूबे की राजनीति के रसूखदारों में अहम स्थान रखते हैं। हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के बाद वे सियासत में पूरी तरह से छा गए। इस कदर नाम उछला कि सपा-बसपा के दिग्गज नेता भी उनसे दोस्ती गांठने में दूर नहीं रहे। कहा जाता है कि हाल ही में जब समाजवादी पार्टी में चाचा-भतीजे की तकरार में चुनाव चिह्न का चक्कर फंस गया तो इसे बचाने में विजय सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई। खुद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका रहस्योद्घाटन फर्रुखाबाद में चुनावी सभा में किया था।
1996 में सक्रिय राजनीति में अाए
विजय सिंह ने 1996 में सक्रिय रूप से राजनीति में कदम रखा। उस समय विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से टिकट हासिल किया था। वे तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने यह चुनाव जीता था। इसके बाद विजय सिंह ने कभी मुड़कर नहीं देखा और उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया। कांग्रेस से जिस तरह से उन्हें तीस हजार वोट हासिल किए इससे भी हौसला मिला। बाद में विजय ने वर्ष 2002 का चुनाव निर्दलीय के रूप में लड़ा और पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 2007 में सपा के टिकट पर विधायक बने।
2007 में मायावती की गोद में बैठे
2007 के विधानसभा चुनाव में मायावती की सरकार बनी तो विजय बसपा में शामिल हो गए। उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद ही मायावती से नजदीकियां बढ़ीं लेकिन मायावती ने उन्हें टिकट न देकर पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा को सदर विधानसभा से चुनाव लड़ाया और कुछ दिनों बाद विजय सिंह को पार्टी से बाहर कर मेजर सुनीलदत्त को शमिल कर लिया। ऐसे में विजय निर्दलीय मैदान में कूदे और अंटू से चुनाव हार गए। वर्ष 2012 का चुनाव विजय सिंह ने निर्दलीय के रूप में लड़ा और यह जीत हासिल की। इस बीच उनकी नजदीकियां सपा के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव से बढ़ीं।
2017 में मोदी लहर में मिली हार
017 के विधानसभा चुनाव में उन्हाने सपा से सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, इसमें उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनीलदत्त ने न सिर्फ विजय सिंह को हराया बल्कि तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया। सियासत में सुर्खियों में रहे विजय सिंह ने राजनीति में स्थापित होने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा के अलावा वे सभी पार्टियों के नेताओं के नजदीकी रहे। इस बार के विधानसभा चुनाव में विजय सिंह अखिलेश के साथ पूरी तरह से जुटे रहे। 
दिल्ली में पकड़े गए थे विजय सिंह
ब्रह्मदत्त की हत्या के बाद विजय सिंह को दिल्ली से पकड़ा गया था। सुधांशुदत्त ने विजय समेत तीन पर मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद से पुलिस ने विजय सिंह की तलाश शुरू हो गई। बताया जाता है कि 2 मार्च 1997 को दिल्ली पुलिस ने विजय को पकड़ लिया, इसके बाद पांच मार्च को सीबीआई की रिमांड पर दिया गया। विजय सिंह दस दिन तक रिमांड पर रहे थे। इसके बाद हत्या का राज खुला। सुधांशुदत्त ने बताया कि बाद में जीवा, रमेश ठाकुर और बलविंदर सिंह बिल्लू के नाम भी सामने आए। रमेश ठाकुर और बलविंदर कहां हैं यह पता नहीं। संजीव जेल में है।
https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/kanpur/story-hc-uphelds-life-sentence-to-vijay-singh-jeeva-in-brahmadutt-dwivedi-murder-case-1111893.html

https://www.livehindustan.com/uttar-pradesh/kanpur/story-brahmadatta-was-shown-in-ramamandir-movement-1111903.html

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  • Web Title:HC uphelds life sentence to Vijay Singh in Brahmadutt Dwivedi murder case