भक्ति, साधना और भजन को धीरे-धीरे बढ़ाएं: आचार्य विजय
Kanpur News - भक्ति, साधना और भजन को धीरे-धीरे बढ़ाएं: आचार्य विजय भक्ति, साधना और भजन को धीरे-धीरे बढ़ाएं: आचार्य विजय भक्ति, साधना और भजन को धीरे-धीरे बढ़ाएं: आचा

कानपुर। सीएसजेएम विश्वविद्यालय स्थित वीरांगना लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित हनुमान कथा के आठवें दिन विजय कौशल महाराज प्रभु महिमा का मनोरम वर्णन किया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के विवाह प्रसंगों का वर्णन किया। मुख्य यजमान उद्योगपति गुलशन धूपद और संजय नेवतिया रहे। आचार्य ने प्रभु श्री राम के स्वयंवर की जीवंत व्यख्या करते हुए कहा कि स्वयंवर में मौजूद लोगों ने प्रभु श्रीराम को अलग-अलग रूप में देखा। कहा धनुष जब अहंकार का प्रतीक हो तब इसे चढ़ाया नहीं तोड़ा जाता है। भक्ति, साधना और भजन धीर-धीरे करें और बढाएं। बताया कि किसी भी अवतार का विधिवत विवाह नहीं हुआ, सिर्फ प्रभु श्री राम का हुआ।
मां जानकी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि वह भक्ति की प्रतीक हैं। ब्रह्म के दर्शन भक्ति के प्रकाश में ही संभव है। भजन नियमित रूप से करना चाहिए। उदाहरण दिया जैसे लताओं वाले पेड़ों को नियमित पानी चाहिए लेकिन वृक्षों को बाद में पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती है। भगवान परमेश्वर हैं जो हमारी कमियों को भी प्रेम में स्वीकार लेते हैं। उन्होंने भक्तों से कहा अपने भीतर देखो और आत्मनिरीक्षण करो। अशुभ होने पर भगवान को लोग याद करते हैं, लेकिन यदि भगवान को याद रखोगे तो अशुभ होगा ही नहीं। महापुरुष एक जाति के नहीं होते वे पूरे समाज के होते हैं। आचार्य ने क्रोध में पहुंचे भगवान परशुराम की प्रतिक्रिया और संवाद का सुंदर वर्णन किया। बताया कि जब भगवान परशुराम भी जान गए कि प्रभु श्रीराम पूर्ण अवतार हैं तो वह भी नतमस्तक हो गए। राजा जनक ने दशरथ जी को बारात लाने का आमंत्रण दिया और भव्य बारात जनकपुरी पहुंची। कथा सुनते हुए भक्त भक्तिभाव में डूब गए। इस अवसर पर उमेश पालीवाल, डॉ विवेक द्विवेदी, अजय पचौरी, उमेश निगम, डॉ सुनील सिंह, रविंद्र पालीवाल, आनंद निगम, सतीष गौतम, राजीव पांडे व बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
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