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फादर्स डे स्पेशल : अनपढ़ पिता की मेहनत को नहीं भूलता डॉक्टर बेटा

हर इंसान के मन में अपने बच्चों को कुछ बनाने की तमन्ना जरुर रहती है, लेकिन कभी संसाधनों की कमी तो कभी जानकारी के अभाव के कारण लोग आगे नहीं जा पाते, लेकिन रसूलाबाद के एक गरीब व्यक्ति ने इन दोनों की परिस्थितियों का सामना करते हुए बेटे को उस मुकाम तक पहुंचा दिया जहां देश और विदेश तक में उसका नाम है। इस मुकाम तक पहुंचने वाला डाक्टर बेटा पिता की मेहनत और तपस्या को याद कर आज भी भावुक हो जाते हैं।

रसूलाबाद क्षेत्र के पालनगर गांव में दलित परिवार में जन्मे सत्यनारायण संखवार के पिता शिवशंकर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। बेटे ने पढ़ने का मन बनाया तो पिता ने अटूट मेहनत कर गांव-गांव गल्ला खरीदने का काम शुरू कर दिया। गल्ला खरीदकर बाजार में बेंचने में कुछ होने वाले मुनाफा से बच्चों की पढ़ाई व पेट भरने में खर्च करने लगे। शिवशंकर ने बड़े बेटे सत्यनारायण को प्राथमिक शिक्षा परिषदीय स्कूल भैसायां में दिलाई। उसके बाद कठारा व रामगढ़ में इंटर तक की शिक्षा दिलाई। इंटर के बाद आगे की पढ़ाई कराने में होने वाले खर्च की समस्या आई तो शिवशंकर ने दिन में गल्ला खरीद व रात में खेतों पर मजदूरी करना शुरू कर दिया। दिनरात की मेहनत से बेटे को जीएसवीएम मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई करवाई। इसके बाद पीजीआई चंडीगढ़ से डिग्री लेने के बाद उनका बेटा सत्य नारायण, डॉ. एसएन संखवार बन चुका है। उनकी पहली तैनाती औरेया में हुई थी। इसके बाद डॉ. एसएन लगातार पिता के आर्शीवाद से आगे बढ़ते रहे। इन दिनों वह किंग जार्ज मेडिकल कालेज लखनऊ में सीएमएस व यूरोलाजी विभाग के हेड हैं। सुपर स्पेशलिस्ट सर्जन होने के चलते प्राय: उन्हें विदेश में जाना होता है। गरीबी में पढ़ाई व इस मुकाम तक पहुंचने में डॉ. एसएन संखवार अपने पिता का हाथ मानते हैं ।

पिता की बात करते हुए वह अब भी भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि 1983 में एमबीबीएस करने के दौरान गरीबी के चलते पढ़ाई अधर में ही छूट रही थी पर पिता ने कर्ज व मेहनत से उनकी पढ़ाई पूरी कराई। पिता की मेहनत से आज वह देश विदेश में चिकित्सा सेवा कर रहे हैं। वह कहतें हैं कि वह चाहते हैं कि हर किसी को उनके पिता जैसा ही पिता मिले।

कक्षा 5 तक पढ़े पिता ने बच्चों को बनाया शिक्षित
पिता शिवशंकर स्वयं तो कक्षा 5 तक पढ़े थे पर बेटों एसएन संखवार को डाक्टर, दूसरे बेटे को शिक्षक बनाया है। बड़े पद पर होने के बाद भी डॉ. एसएन संखवार रसूलाबाद क्षेत्र से परिचित या अपरिचित मरीजों के लखनऊ पहुंचने पर पूरा सहयोग करते हैं।

सरल स्वभाव की दी जाती नजीर
रसूलाबाद के छोटे गांव से राजधानी के अस्पताल में अधीक्षक का कामकाज संभाल रहे डॉ. एसएन संखवार बेहद सरल स्वभाव के हैं। क्षेत्र के लोगों के पहुंचने पर समय निकालकर मिलकर उनकी समस्या का समाधान कराने की ही संभव कोशिश वह करते हैं।

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  • Web Title:Father s Day Doctor Do not forget the hard work of an illiterate father