
मिट्टी का परीक्षण कराकर उर्वरकों का प्रयोग करें: राहुल
Kanpur News - मिट्टी का परीक्षण कराकर उर्वरकों का प्रयोग करें: राहुल मिट्टी का परीक्षण कराकर उर्वरकों का प्रयोग करें: राहुल
कानपुर। जल, वायु एवं मृदा का संरक्षण कृषकों के लिये अतिमहत्वपूर्ण है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां पर अधिकांश जनसंख्या खेती पर निर्भर है। किसान अधिक पैदावार के लिए अंधाधुन्ध उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, जिससे गंभीर बीमारियां होने की सम्भावना बनी रहती है। भूमि बंजर होने की भी आशंका रहती है। मृदा परीक्षण कराकर संस्तुति की मात्रा के अनुसार, उर्वरकों का प्रयोग किसान करें। यह बातें बिल्हौर विधायक राहुल बच्चा सोनकर ने गुरुवार को कहीं। सीएसए के लाल बहादुर शास्त्री कृषक सभागार, प्रसार निदेशालय में रबी उत्पादकता गोष्ठी, तिलहन मेला और उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार योजनान्तर्गत मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीअन्न फसलों की अधिक से अधिक पैदावार करें, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके और किसानों को स्वयं पौष्टिक आहार प्राप्त हो सके। मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने कहा कि अत्याधिक कृषि रसायनों एवं उर्वरकों का प्रयोग एवं वायु, जल, मृदा प्रदूषण के फलस्वरूप विविध प्रकार की समस्याएं प्रकाश में आ रही है इसलिए किसान कम क्षेत्रफल में ही जैविक खेती प्रारम्भ करें। जैविक उत्पादों का बाजार में अच्छा मूल्य मिलता है। किसानों की आमदनी बढ़ती है। उपनिदेशक कृषि डा. आरएस वर्मा ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों को योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती की आवश्यकता के सम्बन्ध में कहा कि जैविक कृषि के माध्यम से कृषि उत्पादन को स्थायित्व प्रदान किया जा सकता है। परम्परागत श्रोतों के उपयोग से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढेगी साथ ही साथ कृषकों की आय में भी वृद्धि होगी। मेले में कृषि (बीज / कृषि रक्षा/ मृदा परीक्षण), रेशम, उद्यान, इफ्को, जैविक खेती आदि पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर के स्टाल लगाए गए। इसमें डा. अखिलेश मिश्रा, डा. रामजी गुप्ता, डा. अरविन्द कुमार, डा. सर्वेश कुमार और डा. महक सिंह आदि मौजूद रहे।

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