EPFO investigation begins fixes liabilities of 35 crores - ईपीएफओ की जांच शुरू, 35 करोड़ के देनदारी तय की DA Image
15 दिसंबर, 2019|9:11|IST

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ईपीएफओ की जांच शुरू, 35 करोड़ के देनदारी तय की

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केस्को संविदाकर्मियों के पीएफ भुगतान में बड़ा घोटाला सामने आया है। केस्को अपने कर्मचारियों का भुगतान करता रहा लेकिन कर्मचारी मुहैया कराने वाली कंपनियों ने भविष्य निधि खाते में पैसा जमा ही नहीं किया। ईपीएफओ अधिकारियों ने सेवा प्रदाता कंपनी से जुड़ी 27 फाइलें जब्त कर ली हैं। मंगलवार को जांच के बाद केस्को की भी जिम्मेदारी तय की गई। जांच में 14 साल का अंशदान, ब्याज और जुर्माना मिलाकर करी 35 करोड़ रुपए पीएफ की देनदारी तय की गई है।


दरअसल अप्रैल 2000 से मार्च 2014 तक संविदा पर तैनात कर्मचारियों के पीएफ का अंशदान सेवा प्रदाता कंपनी ने नहीं जमा किया था। मंगलवार को पीएफ कमिश्नर वीवीबी सिंह और आयुक्त द्वितीय उत्कर्ष जीत सिंह व चेतन यादव ने पीएफ कार्यालय पर लम्बी बैठक की। सोमवार को केस्को से जब्त की गई 27 फाइलों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि केस्को ने पीएफ का भुगतान तो कंपनी को कर दिया लेकिन अधिकारियों ने क्रास चेक नहीं करके बड़ी चूक की है। हर महीने भुगतान किए गए अंशदान की जांच के बाद ही दूसरे महीने का भुगतान कंपनी को किया जाना चाहिए। अधिकारी 14 वर्षों तक आंख बंद किए रहे। जांच अधिकारी केस्को की बड़ी चूक मान रहे हैं और उसी आधार पर केस्को पर देनदारी तय करने की तैयारी हो रही है। इसमें मूलधन के साथ ब्याज और पेनाल्टी वसूला जाना है।

यह लगभग 35 करोड़ रुपए होता है। जांच में पता चला कि केस्को दस कंपनियों ने संविदा कर्मचारी मुहैया कराए थे। इन कंपनियों की गहन पड़ताल शुरू हो गई है। उधर, संविदा कर्मचारी संगठन केस्को के महामंत्री दिनेश सिंह भोले को भी बुलाकर अधिकारियों ने सुनवाई की। दिनेश सिंह भोले का कहना है कि कर्मचारियों को न्याय मिलना चाहिए। संगठन इसकी कोशिश कर रहा है।

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