Kanpur News: कानपुर में अब शाइन सिटी के पास मिला 20 डंपर क्रोमियमयुक्त कचरा
Kanpur News: कानपुर के नर्वल तहसील में जगह-जगह क्रोमियम युक्त कचरे के ढेर लगे हैं। ग्रामीणों को इसका खतरा महसूस हो रहा है क्योंकि यह भूजल और मिट्टी को प्रदूषित कर रहा है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं क्योंकि कचरे के निस्तारण में कंपनियों की लापरवाही झलकती है।

Kanpur News: कानपुर। नर्वल तहसील क्षेत्र में क्रोमियमयुक्त कचरे के ढेर जगह-जगह पड़े हैं। रविवार को पुरवामीर में ही शाइन सिटी के पास 20 डंपर से अधिक कचरा हाईवे किनारे फेंका हुआ मिला, जो बारिश के पानी के साथ जमीन और भूजल को दूषित कर रहा है। यह उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी नाकामी कही जाएगी। क्रोमियम कचरा वाली कंपनियों और कचरे का निस्तारण कर रही कंपनियों की निगरानी अफसर नहीं कर पा रहे हैं। महाराजपुर के पुरवामीर, सरसौल स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के पास, महोली मोड़ और तिवारीपुर गांव के बाद अब शाइन सिटी में मिले क्रोमियम युक्त कचरे ने सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। पुरवामीर के ग्रामीणों ने फतेहपुर की ओर से क्रोमियम कचरा फेंकने आए डंपर की तस्दीक की थी। तब पूर्व सांसद अनिल शुक्ल वारसी पर कचरा फिंकवाने के आरोप लगे थे। शनिवार को पूर्व सांसद वारसी ने एक वीडियो मैसेज भेजकर दावा किया था कि कानपुर देहात की एक कंपनी क्रोमियम युक्त कचरा फेंक रही है। वीडियो में खुद को कंपनी का सिक्योरिटी गार्ड बताने वाले व्यक्ति बोल रहा था कि उसकी कंपनी से रोज डंपरों में क्रोमियम का कचरा बाहर जाता है। पूर्व सांसद के भेजे गए वीडियो के कंटेंट की सत्यता की पुष्टि आपका अपना अखबार ‘हिन्दुस्तान’ नहीं करता है.
चरवाहों में दहशत का माहौल
हाईवे किनारे गांवों में मिल रहे क्रोमियम युक्त कचरे को लेकर ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं। शाइन सिटी के पास ही खेत में भैंस पालन करने वाले पुरवामीर के रामसजीवन पाल ने बताया कि इस कचरे से जीवन को खतरा पैदा हो गया है। मवेशियों को चराने के लिए खेतों में ले जाते हैं। बारिश में कचरे से क्रोमियम बहकर खेतों में जा रहा है। क्रोमियम से प्रदूषित घास यदि मवेशी खाते हैं, तो दूध का सेवन करने वाले भी क्रोमियम से पीड़ित हो जाएंगे। यही वजह है कि चरवाहे मवेशियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं कि क्रोमियम युक्त कचरे के आसपास की घास को न चर पाएं.
यूपीपीसीबी लेखा-जोखा की करता है निगरानी
यूपीपीसीबी के कानपुर नगर आरओ अजीत कुमार सुमन का दावा है कि नर्वल तहसील क्षेत्र में क्रोमियम का जो कचरा फेका जा रहा है, वह बेसिक क्रोम सल्फेट है। बेसिक क्रोम सल्फेट वाली कोई फैक्ट्री कानपुर नगर में नहीं है। कानपुर नगर के आरओ के दावे को सही मान लिया जाए तो फिर क्रोमियम कचरा निकलने वाली फैक्ट्रियां कानपुर देहात और फतेहपुर में हैं। ऐसे में, बड़ा सवाल है कि कचरा किस जिले की फैक्ट्री का कचरा नर्वल तहसील क्षेत्र में फेंका जा रहा है। दूसरी तरफ कागजी सिस्टम की बात करें तो खतरनाक कचरा पैदा करने वाली कंपनियों में लॉग रजिस्टर होता है। कचरे का निस्तारण कौन सी कंपनी करती है। इसकी ब्योरा यूपीपीसीबी के पास होता है। यूपीपीसीबी के अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह फैक्ट्री से निकले खतरनाक कचरे और निस्तारण करने वाली कंपनी के लॉग रजिस्टर का मिलान करते हैं.
निस्तारण का खर्च बचाने को फैला रहे प्रदूषण
क्रोमियम युक्त कचरे के निस्तारण में कम से कम 12 रुपये प्रति किलो का खर्च आता है। कचरे में क्रोमियम की अधिक मात्रा होने पर निस्तारण का खर्च 18 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है। चूंकि, क्रोमियम का कचरा फैक्ट्रियों से रोजाना कई टन निकलता है। इसलिए खर्च को बचाने के लिए फैक्ट्री संचालक निस्तारण के बजाय कचरे को इधर-उधर फेंक दे रहे हैं.
757 गुना पुरवामीर के पानी में मिला था क्रोमियम
नर्वल तहसील क्षेत्र में क्रोमियम युक्त कचरा फेंक रहीं फैक्ट्रियां भूजल और मिट्टी में जहर घोल रहीं हैं। पुरवामीर में पानी और सॉलिड वेस्ट के सैंपल में क्रोमियम की पुष्टि हुई थी। पानी में क्रोमियम की मात्रा मानक से 757 गुना ज्यादा मिली थी। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की रिपोर्ट में सतही जल (तालाब) में क्रोमियम 37.86 मिग्रा प्रति लीटर मिला है। लैंड फिल के सॉलिड वेस्ट में 36.29 मिग्रा प्रति लीटर क्रोमियम पाया गया है.


