Kanpur News: पेड़ कटने से तपिश और जल संकट से जूझ रहे लोग
Kanpur News: कानपुर देहात में हर साल पौधरोपण अभियान में लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनके संरक्षण की अनदेखी से बहुत से पौधे सूख जाते हैं। इस साल 56,92,100 पौधे लगाने का लक्ष्य है। पिछले पांच वर्षों में 2.86 करोड़ पौधे लगाए गए, पर अधिकांश की देखभाल नहीं होने से वे पेड़ नहीं बन सके।

Kanpur News: कानपुर देहात, संवाददाता। जिले में हरसाल जुलाई माह में चलने वाले पौधरोपण अभियान में लाखों की संख्या में पौधेरोपित किए जाते हैं। इसके लिए वन विभाग के साथ ही अन्य विभागों को लक्ष्य भी आवंटित किया जाता है, लेकिन अभियान खत्म होते ही रोपे गए पौधों के सत्यापन व उनके संरक्षण की अनदेखी से लगाए गए पौधों में आधे भी पेड़ नहीं बन पाते। पेड़ों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारों के साथ ही लोगों के भी गंभीर नहीं होने से पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है। इसके साथ ही हरियाली व वनक्षेत्र में कोई खास इजाफा नहीं हो सका है। जनपद में इस साल 56,92,100 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गत 12 जुलाई को केंद्रीय नबीपुर में राज्यमंत्री प्रतिभा शक्ला व डीएम कपिल सिंह की मौजूदगी में पौधरोपण समारोह का आयोजन हुआ था। जबकि उसी दिन जिले के नोडल अफसर व आयुक्त ग्राम्य विकास जीएस प्रियदर्शी ने माती की अमूल डेयरी परिसर के अलावा अकोढी व रसधान में पौधरोपण में हिस्सेदारी की थी। इस मौके पर जिले में 50.38 लाख पौधे रोपित किए जाने का दावा किया गया था। जबकि शेष पौधे रोपित होने हैं। इसके पहले पिछले पांच साल में दो करोड़ 86 लाख 38 हजार पौधेरोपित किए गए। लेकिन लोगों के उदासीन रवैये, व्यवस्था की खामी और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते रोपे गए अधिकांश पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए। जबकि मवेशियों के इन पौधों के चट कर लेने से वह पेड़ नहीं बन सके। पिछले वर्षों में रिकार्ड बनाने के लिए कराए गए पौधरोपण अभियान में रसूलाबाद क्षेत्र के जोत व बहादुरपुर वन ब्लॉक में रोपे गए लाखों पौधे पेड़ नहीं बन सके। इसी तरह बंजारी ताला में डिप्टी सीएम केशव मौर्या की देखरेख में हुए पौधरोपण में आधे पौधे ही पेड़ की शक्ल ले सके। जबकि चपरघटा दुआरी, दिबैर, उदईपुर, बेहमई, भरतौली, अमराहट, हरिकिशनपुर में लगे लाखों पौंधों का अता पता नहीं है। इससे धरती की गोद हरी भरी नहीं हो सकी। सिर्फ सिकंदरा कानपुर हाईवे के किनारे व अकबरपुर तहसील के पास ही रोपे गए पीपल के पेड़ ही हरियाली कायम रखे हैं.
पौधरोपण के बाद उनके संरक्षण में नहीं रहती दिलचस्पी
जनपद में हरियाली बढ़ाने के लिए वर्ष 2021 में 50.38 लाख पौधे लगाए गए थे। जबकि वर्ष 2022 में 5,97,5363 वर्ष 2023 में 5530606 व वर्ष 2024 में 6190645 व 2025 में 5956400 पौधे रोपित किए गए। पिछले चार साल में 2,36,53014 पेड़ लगाए गए। लेकिन पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन करने में जिम्मेदारों के साथ लोग भी उदासीन रहे। हर साल लाखों की तादात में पेड़ लगने के बावजूद अभी तक जिले में 33 फींसदी के सापेक्ष महज नौ फीसदी ही वन क्षेत्र हो पाया है। वहीं लगाये गए पौधों में से कितने बचे हैं। इसका आंकड़ा वन विभाग दे नहीं पाया.
पिछले पांच वर्षों में वन क्षेत्र में कमी
जिले में वर्ष 2021 में वनक्षेत्र 41 स्क्वायर वर्ग किमी था। जो 2025 में बढ़कर 47.6 स्क्वायर वर्ग किमी हो गया है। पांच साल में वन क्षेत्र में 6.6 स्क्वायर वर्ग किमी की बढ़ोत्तरी हुई है। वन हमारी प्राकृतिक संपदा है। इसे नष्ट करने से जीवन भी प्रभावित होगा। पेड़ों को बचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वन विभाग में पौधरोपण सतत प्रक्रिया है। जो पौधे नष्ट होते हैं, उनके स्थान पर नए पौधे लगाए जाते हैं। पौधरोपण में कितने पौधे नष्ट हुए सही जानकारी रिकार्ड देखकर ही बता पाना संभव है.
प्रोमिला,डीएफओ।


