
काम की व्यस्तता से मस्तिष्क अस्त-व्यस्त: डॉ. अवध
Kanpur News - कानपुर में डीएवी कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में डॉ. अवध दुबे ने कहा कि भागदौड़ और तनाव के कारण जीवन का सही उद्देश्य पीछे छूटता जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों को मानसिक रूप से मजबूत रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य और अन्य शिक्षकों ने भी विचार साझा किए।
कानपुर, प्रमुख संवाददाता। डिजिटल होते युग में भागदौड़ भरी जिंदगी, समाज में पाश्चात्य सभ्यता का नकारात्मक असर और बढ़ते तनाव के कारण जीवन का सही उद्देश्य पीछे छूटता जा रहा है। हमारा मस्तिष्क इतने तरह के विचारों और काम की व्यस्तता से अस्त-व्यस्त हो गया है कि वह अंतरआत्मा के आगाह करने पर भी समझ नहीं पा रहा है। जिससे हम संतुलित जीवन, आनंद और अपने कार्यों, जीवन की सार्थकता एवं राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्व से विमुख होते दिख रहे हैं। यह बात डीएवी कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि आरके देवी मेमोरियल हॉस्पिटल स्वरूप नगर के निदेशक डॉ. अवध दुबे ने कही।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण करने वाले शिक्षकों को मानसिक रूप से मजबूत रहना जरूरी है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अवध दुबे एवं कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार दीक्षित ने किया। प्रो. दीक्षित ने कहा कि आर्थिक युग में जीवन में तनाव बढ़ता जा रहा है। भागदौड़ की इस दुनिया में हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि खुद से भी दूर होते चले जा रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन एनईपी 2020 के समन्वयक प्रोफेसर सुनीत अवस्थी ने किया। इस मौके पर डॉ. अनुराग सक्सेना, प्रो. अजय स्वरूप, प्रो. पुष्पेंद्र त्रिपाठी, प्रो. विनोद कुमार पांडे, प्रो. जेपी श्रीवास्तव, प्रो. सुषमा निषाद उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सवितुर प्रकाश गंगवार ने किया।

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