
एलएफजी से फायरकर परखी गोले-बैरलों की क्षमता
Kanpur News - एलएफजी से फायरकर परखी गोले-बैरलों की क्षमता एलएफजी से फायरकर परखी गोले-बैरलों की क्षमता एलएफजी से फायरकर परखी गोले-बैरलों की क्षमता
कानपुर। पनकी स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की प्रूफ फायरिंग रेंज में शुक्रवार को डीजीक्यूए ने 105 एमएम लाइट फील्डगन (एलएफजी) तोप से तीन राउंड फायरिंग करवाकर गुणवत्ता को परखा। गुणता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए) के महानिदेशक एन मनोहरन ने गोलों और बैरलों की मारक क्षमता और गुणवत्ता देखी। तीन राउंड की टेस्ट फायरिंग सफल रही। ओएफसी में बने अलग-अलग मारक क्षमता और कैलिबरों के गोलों की शेल, फील्डगन फैक्ट्री में बन रहीं बैरलों और स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री में बन रहे हथियारों की गुणवत्ता परखी। ओएफसी स्थित वरिष्ठ गुणता आश्वासन स्थापना-आयुध (एसक्यूएई-अर्मामेंट) में कर्नल गिरीश चौधरी ने डीजी मनोहरन का स्वागत किया। डीजीक्यूए के महानिदेशक ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों की यूनिटों में बन रहे उत्पादों की गुणवत्ता परखने के बाद ओएफसी स्थित डीजीक्यूए के सम्मेलन कक्ष में डीपीएसयू एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (अवेल) के सीएमडी उमेश सिंह और अर्मापुर की तीनों फैक्ट्रियों के कार्यकारी निदेशक, जीएम और वरिष्ठ प्रबंधकों के साथ बैठक की।
एसक्यूएई-अर्मामेंट के कर्नल गिरीश चौधरी ने क्वालिटी की जांच संबंधी प्रक्रिया के बारे में बताया। एन मनोहरन ने स्वदेशी डिजाइन, ईज आफ डूइंग बिजनेस, डेवलपमेंट और मैन्यूफैक्चरिंग के जरिये आत्मनिर्भरता, स्वचालन और इंडस्ट्री और क्यूए 4.0 के बारे में बताया। बताया कि डीजीक्यू ने प्रूफ और टेस्टिंग सुविधाओं को बढ़ाने के लिये रोड मैप तैयार किया है। इसमें मौजूदा और भविष्य की डिफेन्स टेस्टिंग की जरूरतों के मद्देनजर शुरू हुए कई शॉर्ट और लान्ग टर्म प्रोजेक्ट के बारे में बताया गया। इस दौरान तीनों फैक्ट्रियों के ईडी, जीएम मौजूद रहे। ऐसे परखी गई मारक क्षमता पनकी स्थित फायरिंग रेंज में लाइट 105/37 फील्डगन तोप से निकले गोले को एक निश्चित दूरी पर फायर कराकर जांचा गया। कुछ किमी की प्रूफ रेंज से गोला बाहर न निकल सके, इसके लिए खास इंतजाम किए गए थे। फायरिंग रेंज में बट लगाई गईं थीं। यह एक किस्म की दीवार बनाई जाती है जो गोलों को रोक लेती हैं। इमसें आठ फीट मोटी सीमेंटेड परत, उसके ऊपर छह फीट मोटी लकड़ी की परत और इसके ऊपर छह फीट मोटी बालू की परत की दीवार होती है। फायरिंग के बाद इसी दीवार में गोले धंस जाते हैं। गोला इस परत को कितना भेद सका, इससे उसकी उसकी तीव्रता की जांच होती है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता के लिए डीजीक्यूए की यूनिट एसक्यूएई-अर्मामेंट ओएफसी में बना है। एसक्यूएआई के प्रमुख कर्नल गिरीश चौधरी हैं, जिनकी टीम लगातार उत्पादों की क्वालिटी की जांच करती है।

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