
साइबर ठगों के रडार पर डॉक्टर, कानपुर में बने आसान शिकार
Kanpur News - कानपुर में, डॉक्टर साइबर ठगों के आसान शिकार बन रहे हैं। इस पर, आईएमए ने एक वर्कशॉप आयोजित की। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि डिजिटल फ्रॉड 70% बढ़े हैं। ठग भ्रम और लालच का इस्तेमाल करते हैं। डॉक्टरों को जागरूकता और डेटा सुरक्षा अपनाने की सलाह दी गई।
कानपुर में साइबर ठगों के लिए डॉक्टर आसान शिकार बन रहे हैं। कई डॉक्टर ठगी का शिकार होकर अपनी जमा पूंजी गंवा चुके हैं, लेकिन बदनामी और संकोच के डर से अधिकतर मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बुधवार को डॉक्टरों के लिए एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया। इस वर्कशॉप में साइबर सुरक्षा, डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी, फेक कॉल, डेटा प्राइवेसी और सोशल मीडिया पर पेशेवर व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।

वर्कशॉप के मुख्य अतिथि पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि डॉक्टर ऑनलाइन कंसल्टेशन और डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल के कारण साइबर अपराधियों का शिकार आसानी से बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों में करीब 70% तक की भारी वृद्धि हुई है, जिसमें पेशेवर वर्ग, खासकर डॉक्टर, तेजी से निशाना बन रहे हैं। अपराधी तकनीक के साथ-साथ 'भ्रम, घबराहट, भरोसा और लालच' जैसे मनोवैज्ञानिक हथकंडों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। 'आपका खाता बंद हो जाएगा', 'केवाईसी अपडेट कराएं', या 'आपके खिलाफ शिकायत दर्ज है' जैसे संदेश इन्हीं जालों का हिस्सा होते हैं।
वक्ताओं ने वास्तविक मामलों के उदाहरणों से साइबर अपराध के नए तरीकों की जानकारी दी और उनसे बचाव के लिए व्यावहारिक उपाय भी समझाए। उनका स्पष्ट संदेश था कि समय पर जागरूकता, किसी भी जानकारी का सत्यापन, डिजिटल सतर्कता और डेटा सुरक्षा की आदत अपनाना ही इन ठगों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने भी साथी डॉक्टरों के साथ हुए धोखे के मामलों का जिक्र किया, जिससे सभी को सचेत किया जा सके।

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