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कानपुर

कोरोना ने छीनी उम्मीदें, 15 माह में सिर्फ 17 नेत्रदान

हिन्दुस्तान टीम,कानपुरPublished By: Newswrap
Fri, 23 Jul 2021 08:20 PM
कोरोना ने छीनी उम्मीदें, 15 माह में सिर्फ 17 नेत्रदान

कोरोना संक्रमण के चलते शहर में नेत्रदान न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। पंजीकृत लगभग 300 नेत्रहीनों को रोशनी मिलने की हसरत अधूरी रह गई है। 15 महीने में सिर्फ 17 नेत्रदान हुए हैं। सिर्फ 30 लोगों का ही कार्निया प्रत्यारोपण किया जा सका है। यहां तक 51 लोगों के संकल्प पत्र भी अधूरे रह गए। उनकी मौत के बाद कार्निया को सुरक्षित नहीं किया जा सका।

कोरोना काल से पहले शहर में हर माह 20-25 नेत्रदान होते रहे हैं पर कोरोना संक्रमण ने नेत्रदान पर ब्रेक लगा दिया। अब लोग संकल्प के बाद भी मौत के बाद नेत्रदान नहीं कर सके। युग दधीचि देहदान अभियान के संयोजक को शहरियों ने मौत से पहले नेत्रदान का संकल्प पत्र भी सौंपा पर कोरोना की वजह से उनका संकल्प पूरा नहीं हो सका। सभी के नेत्रदान के संकल्प पत्र पड़े रहे।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग ने इस दौरान सिर्फ पांच नेत्रदानियों का कार्निया सुरक्षित कर 9 लोगों का ही कार्निया प्रत्यारोपण किया। मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.शालिनी मोहन ने भी माना कि नेत्रदान की कोशिशों पर कोरोना ने ब्रेक लगाया है पर अब लोगों से अपील है कि नेत्रदान के लिए आगे आएं, क्योंकि लगातार लोग सम्पर्क कर रहे हैं पर कार्निया सुरक्षित न होने से मुश्किलें आ रही हैं।

देहदान-नेत्रदान की नीति बनाने की मांग

युग दधीचि अभियान के प्रमुख मनोज सेंगर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मेडिकल कॉलेजों देहदान की स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। सीएम को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि अब तक अभियान के तहत 232 पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेजों को दान किए गए हैं पर अब सभी कॉलेजों में देहों की कमी हो गई है। लगातार संकल्प पत्र अधूरे रह रहे हैं। इसलिए भावी डॉक्टरों और मानव कल्याण के लिए देहदान और नेत्रदान की साफ नीति बना दी जाए ताकि संकल्प लेने वालों के परिजनों में निराशा के बादल छंट सकें।

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