केमिकल रंग नुकसानदेह, इस बार हर्बल रंगों से खेलें होली
Kanpur News - कानपुर देहात में होली का त्योहार रंगों और खुशियों का प्रतीक है। हालांकि, सिंथेटिक रंगों का उपयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। डॉक्टरों का सुझाव है कि हर्बल रंगों का उपयोग करना बेहतर है। हर्बल रंग त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।

कानपुर देहात, संवाददाता। रंगों का पर्व होली आपस में खुशियां बांटने और रिश्तों में हंसी-ठिठोली की मिठास घोलने का त्योहार है। खुशी व मस्ती में सराबोर करने वाली होली में हुड़दंग पर किसी का जोर नहीं चलता है। होली में रंग न हों ऐसा हो नहीं सकता, लेकिन उत्साह व उमंग में सिंथेटिक रंग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालते हैं। ऐसे में इस बार हर्बल रंगों से होली खेलने पर लोगों का अधिक जोर है। डाक्टरों का भी कहना है कि रंग खेलें, लेकिन सावधानी रखना जरूरी है। रंग खेलने में लापरवाही त्योहार की खुशियों को फीका कर सकती है। होली में एक-दूसरे को रंग लगाने का आनंद व उत्साह तथा उमंग में सिंथेटिक रंग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।
केमिकल रंग त्वचा, आंख व शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित होते हैं। ऐसे में प्राकृतिक रंगों के साथ होली खेलना अधिक बेहतर है। इससे जहां शरीर को कोई नुकसान नहीं है। प्राकृतिक रंग त्वचा को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे अधिक कोमल बनाते हैं। इनको घरों में आसानी से तैयार किया जा सकता है। अब तो बाजार में भी प्राकृतिक रंग आ रहे हैं। होली के हुडदंग में बरते सवाधानी, लापरवाही नुकसानदेह होली पर मस्ती की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन होली खेलते समय सावधानियां रखना जरूरी होता है।केमिकल रंग से शरीर में दाने पड़ने के साथ ही स्किन मे ंरूखापन आता है। शरीर पर रंगों का विपरीत असर न पड़े, इसके लिए डॉक्टरों ने होली खेलते समय बालों में तेल व त्वचा पर तैलीय पदार्थ क्रीम लगाने व हर्बल रंगों का ही प्रयोग करने की सलाह दी। होली में नाक-कान का भी रखें ख्याल जिला अस्पताल के नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज शुक्ला का कहना है कि मिलावटी रंग इयर कैनाल के संवेदी ऊतकों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह ध्वनि को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलकर दिमाग तक पहुंचाते हैं। इससे बहरेपन की संभावना होती है। सिंथेटिक रंग छोटे-छोटे अन्य ऊतकों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा रहता है। त्वचा पर प्रतिकूल असर नहीं डालता हर्बल रंगों का प्रयोग एकीकृत आयुष चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. ब्रजेश आर्या का कहना है कि हर्बल रंगों के लिए नीम, टेसू, मेहंदी, अमलतास, गेंदा, हल्दी, केसर आदि से रंग बनाकर होली खेली जाती थी। यह सभी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। इनका सेवन व लेपन, दोनों ही बहुत कारगर हैं। हल्दी विशिष्ट गुणों से भरपूर है। इसी तरह टेसू कफ का नाश करता है। नीम त्वचा के संक्रमण में बहुत लाभकारी है। नीम से बना रंग शरीर में पड़ेगा तो त्वचा पर प्रतिकूल असर नहीं होगा। ।
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