DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राममंदिर आंदोलन में भी ब्रह्मदत्त ने दिखाया था दम

ब्रह्मदत्त द्विवेदी। (फाइल चित्र)

ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने राममंदिर आंदोलन में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और आंदोलनकारियों को अयोध्या तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद से ही खुफिया समेत विभिन्न जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। इसके कारण काफी दिनों तक द्विवेदी को भूमिगत रहना पड़ा था। अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस होने से पहले न सिर्फ फर्रुखाबाद बल्कि आसपास के जिलों शाहजहांपुर, इटावा, फिरोजाबाद, बदायूं, हरदोई आदि से रामभक्तों को संगठित करके अयोध्या भेजने में उन्होंने अहम भूमिका थी। इसके बाद से ही वह सुर्खियों में आ गए थे। तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में उन्हें ढूंढने के लिए पुलिस ने काफी प्रयास किया मगर वह हत्थे नहीं चढ़े। इस दौरान द्विवेदी शहर में ही रहे मगर वेष बदलकर। 
पांच बार एमएलए रहे ब्रह्मदत्त
फर्रुखाबाद। ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने यहां की राजनीति में कुछ ही समय में अपनी पहचान बना ली थी। अपनी कार्यशैली से उन्होंने जनमानस में अमिट छाप छोड़ी थी। इसकी बदौलत उन्हें पांच बार विधायक बनने का गौरव मिला। हत्या के समय भी वह विधायक थे। मूल रूप से अमृतपुर के निवासी ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने सभासद बनकर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। 1971 में वार्ड नंबर 6 से सभासद चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे नहीं देखा और अपने संघर्षो की बदौलत राजनीति में स्थापित हो गए। 1977 में विधानसभा का चुनाव लड़ा और पहली बार में जीत हासिल कर ली। इसके बाद वह 1985 में भी विधायक रहे। 1991, 1993 और 1996 में लगातार विधायक चुने गए। हत्या के बाद 1997 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी प्रभा द्विवेदी ने चुनाव जीता था। द्विवेदी की खासियत थी कि उनकी कार्यशैली के विरोधी भी कायल हुआ करते थे। 

ब्रह्मदत्त द्विवेदी की बहू अनीता द्विवेदी।
आज द्विवेदी जी को सच्ची श्रद्धांजलि मिली : अनीता
फर्रुखाबाद। सदर विधायक मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी की पत्नी अनीता द्विवेदी ने कहा कि आज द्विवेदी जी को सच्ची श्रद्धांजलि मिली है। उन्होंने बताया कि वह इस समय जगन्नाथपुरी दर्शन करने गई हैं। पता था कि सुनवाई हो चुकी है। अब फैसला आना है। इसलिए भगवान के यहां माथा टेका। जैसे ही दर्शन करके निकलीं और फोन ऑन किया तो खबर आ गई। सुनकर बड़ा अच्छा लगा। असली मायने में आज हम जीते हैं। 
उन्होंने कहा कि मेजर सुनील दत्त ने कभी कोई गलत रास्ता नहीं अपनाया। हम तो भगवान पर भरोसा करते हैं। उसने आज मेरी सुन ली है। बातचीत के दौरान वह रुंधे गले से बोलीं, आंसू निकल रहे हैं समझ में नहीं आ रहा खुशी के हैं या जीत के। बस जो फैसला सुनाया गया है उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद। उन्होंने कहा कि द्विवेदी जी सबके नेता थे। वह सबकी बात सुनते थे और सबके लिए कुछ करने को हमेशा तैयार रहते थे। जिस तरह से वह हमारे बीच से गए, उससे हम सबको बड़ी ठेस लगी थी। 

फर्रुखाबाद सदर विधायक मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी।
भगवान के यहां देर है अंधेर नहीं :  मेजर सुनीलदत्त 
फर्रुखाबाद। हत्याकांड में हाईकोर्ट के फैसले पर सदर विधायक और ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी ने कहा कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। आज सच की जीत हुई है। 
जिस समय मेजर द्विवेदी को लखनऊ से फैसले की खबर मिली, उस समय वह अपने आवास विकास कार्यालय पर जनता की समस्याएं सुन रहे थे। खुशी में मेजर के छोटे भाई प्रियांकदत्त द्विवेदी के आंसू छलक आए। कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ता लोगों का मुंह मीठा कराने लगे। पत्रकारेां से बातचीत करते हुए मेजर द्विवेदी ने कहा कि आज का दिन बड़ा अच्छा है। सच की जीत हुई है। हमारी मेहनत रंग लाई है। जनता ने हम पर जो भरोसा किया था, उस पर आज हम खरा उतरे हैं। जनता ने पहले विधायक बनाया और आज यह फैसला आया। यह बड़ी जीत है। द्विवेदी जी प्रदेश के नेता थे। भाजपा के बड़े नेताओं में उनका नाम था। उनके न रहने से तमाम समस्याएं आईं। इन सबके बाद भी हमने कदम पीछे नहीं खींचा। हर हालात में संघर्ष किया। 
पहले ही था भरोसा होगी जीत : सुधांशुदत्त
फर्रुखाबाद।  ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे व वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशुदत्त द्विवेदी ने कहा कि उन्हें पहले ही भरोसा था कि जीत हमारी ही होगी। उन्होंने बताया कि जब द्विवेदी जी की हत्या हुई थी उसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो गई थी कि इसमें कौन कौन लोग शामिल हैं। दोपहर में जब सेनापति आवास पर सुधांशुदत्त द्विवेदी के फैसले की खबर मिली तो परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सुधांशु के अलावा उनकी पत्नी और बच्चे भी खुश हो गए। स्व. द्विवेदी के चित्र पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि काफी समय से हम लोग उम्मीद लगाए थे, जो आज पूरी हो गई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Brahmadatta was shown in Ramamandir movement