शिखर पर पहुंचना सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि भारतीय नारी का सामर्थ्य साबित करना है : आशा
Kanpur News - 78वें भारतीय सेना दिवस पर मध्य प्रदेश की महिला साइकिलिस्ट आशा मालवीय ने साइकिल यात्रा शुरू की। उन्होंने गुजरात से कानपुर तक 3800 किलोमीटर की यात्रा की और आगे अरुणाचल प्रदेश तक 7800 किलोमीटर का सफर तय करेंगी। उन्होंने नारी शक्ति का संदेश दिया और पहाड़ों की कठिनाइयों पर चर्चा की।

78वें भारतीय सेना दिवस के समर्पण में मध्य प्रदेश के राजगढ़ निवासी महिला साइकिलिस्ट आशा मालवीय रविवार को साइकिल चलाकर श्यामनगर स्थित 37वीं वाहिनी पहुंची। जहां पर उनका स्वागत किया गया। पीएसी में पहुंचकर उन्होंने नारी शक्ति को लेकर कहा कि शिखर पर पहुंचना सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाना नहीं बल्कि भारतीय नारी का सामर्थ्य साबित करना है। साइकिलिस्ट आशा मालवीय ने भारतीय सेना दिवस के चलते सेना के सम्मान में अपनी यात्रा गुजरात से शुरू की थी। वह करीब 3800 किलोमीटर चलकर कानपुर पहुंचीं। आगे वह अरुणाचल प्रदेश तक पहुंचकर अपना 7800 किलोमीटर का सफर पूरा करेंगी। उन्होंने पीएसी जवानों के बीच अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनसे अक्सर लोग एक महिला होकर अकेले बेहद दुर्गम रास्तों और पहाड़ों के सफर की कठिनाइयों पर पूछते हैं, तो उन्हें बस एक बात कहना चाहतीं हूं कि पहाड़ की ऊंचाई पैरों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से नापी जाती है।
वाहिनी के सेनानायक बीबी चौरसिया ने आशा मालवीय को प्रशस्ति पत्र देकर उनके साहस, दृढ़ निश्चय एवं प्रेरणादायक प्रयासों की सराहना की। इस मौके पर शिविर पाल चंद्रेश्वर, आरटीसी प्रभारी मनोज श्रीवास्तव, सुरेंद्र सिंह, रामेंद्र पटेल आदि रहे।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


