रोजगार का दुश्मन नहीं, इंसानों का मददगार है एआई
एचबीटीयू के कंप्यूटर साइंस विभाग ने 'ह्यूमन-सेंट्रिक एंड रिस्पान्सिबल एआई' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि एआई रोजगार को खत्म नहीं करेगा, बल्कि इंसानों की मदद करेगा। मुख्य वक्ता प्रो. वाईएन सिंह ने मानव मूल्यों के साथ एआई तकनीकों के विकास का महत्व बताया।

एचबीटीयू के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग और द इंस्टीट्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) कानपुर चैप्टर की ओर से एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसका विषय ह्यूमन-सेंट्रिक एंड रिस्पान्सिबल एआई रहा। जिसमें विशेषज्ञों ने कहा कि एआई के आने से रोजगार खत्म नहीं होगा, बल्कि यह इंसानों की मदद करेगा और उनके काम को आसान बनाने के साथ समय की बचत करेगा।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों की भागीदारी
संगोष्ठी में देश-विदेश के शोधार्थी, शिक्षा व उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने एआई के भविष्य और नैतिक पहलुओं पर मंथन किया। मुख्य वक्ता आईआईटी के प्रो. वाईएन सिंह ने कहा कि भविष्य की एआई तकनीकों का विकास मानव मूल्यों एवं सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना अनिवार्य है।
उद्योग जगत और शिक्षा के बीच संबंध
विवि के कुलपति प्रो. समशेर ने कहा कि नवीन तकनीकी शोध और उद्योग जगत की व्यावहारिक जरूरतों से शिक्षा को जोड़ने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि उद्यमी दीपक अग्रवाल ने उद्योग जगत में एआई, डिजिटल परिवर्तन और जिम्मेदार तकनीकी नेतृत्व की भूमिका और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटरा के कुलपति प्रो. मनोज गुप्ता ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरेक्शन, न्यूरल इंटरफेस और मानव-मशीन सहयोग की उभरती संभावना पर मंथन किया।
भविष्य के तकनीकी आयाम
यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलॉजी सिडनी के डॉ. अवनीश ने मानव-मशीन सहयोग के वैश्विक परिदृश्य और भविष्य के तकनीकी आयाम के बारे में बताया।
सामान्य प्रश्न
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